Headlines

आचार्य पार्श्वचंद्रजी का 66 वां दीक्षा दिवस एवं डॉ. पदमचंद्रमुनिजी का 39 वां दीक्षा दिवस समारोह संपन्न

Acharya Parshwachandraji Padammuniji Jaymal Shravak Sangh

जन्म से भी अधिक महत्वपूर्ण है संयम ग्रहण करना : डॉ. पदमचंद्रमुनिजी

बेंगलूरु । माँ की कुक्षि से जन्म लेने वाला जन्म – मरण के दुखों को मिटाएगा या नहीं यह आवश्यक नहीं है। किन्तु गुरु मुख से संयम स्वीकार कर सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र की आराधना करने वालों को संसार की भव यात्रा से विराम मिल जाता है। उपरोक्त विचार श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ, बेंगलूरु शाखा के तत्वावधान में गुरु ज्येष्ठ पुष्कर जैन आराधना केंद्र में आयोजित आचार्य पार्श्वचंद्रजी का 66 वां दीक्षा दिवस एवं डॉ. पदमचंद्रमुनिजी का 39 वां दीक्षा दिवस समारोह में डॉ. पदमचंद्रमुनिजी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि आचार्य पार्श्वचंद्रजी ने अपनी सुदीर्घ संयम पर्याय में अनेकों विशिष्ट साधनाएँ सिद्ध की। वे वचन सिद्ध साधक हैं। कम बोलते हैं परन्तु सटीक कहते हैं। आपने जिनशासन की महती प्रभावना की है और जन जन में धर्म के प्रति चेतना का संचार किया है।


जयधुरंधरमुनिजी ने कि खेलने कूदने मौज करने की उम्र में आचार्य पार्श्वचंद्रजी ने संयम स्वीकार कर संसार से अनासक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। आध्यात्मिक, वैज्ञानिक अथवा व्यावहारिक हर क्षेत्र का उन्हें ज्ञान हैं। उनकी जिह्वा पर मनो सरस्वती का वास है। जयकलशमुनिजी एवं जयसुबोधमुनिजी ने प्रेरक गीत पार्श्व पदम गुरुवर महान के द्वारा वातावरण को श्रद्धामय बना दिया। जयपुरंदरमुनिजी मनुष्य भव, जिनवाणी श्रवण, वीतराग वचनों पर श्रद्धा और संयम में पराक्रम को अत्यंत दुर्लभ बताते हुए कहा कि गुरु पारस के सानिध्य में साधक का जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि पारसमणि तो संपर्क में आनेवाले को सोना कर देता है लेकिन गुरु तो शिष्य को अपने समान बना देते हैं। जयसंयतमुनिजी, जैन समणी प्रमुखा श्रीनिधिजी, समणी निदेशिका श्रुतनिधिजी, समणी निदेशिका डॉ. सुयशनिधिजी, समणी सुगमनिधिजी, सुधननिधिजी, सुयोगनिधिजी की भी उपस्थिति रही। इस अवसर पर मुमुक्षु अभिषेकजी चोपड़ा के परिवारजनों प्रकाशचंदजी, संजयकुमारजी – सुनीताजी चोपड़ा, मीनाजी हितेशजी बोहरा, आरतीजी प्रवीणजी कोठारी, संजनाजी चोपड़ा द्वारा दीक्षा आज्ञा पत्र आचार्य पार्श्वचंद्रजी के चरणों में समर्पित किया गया। जय पार्श्व पद्मोदय अहिंसा रिसर्च फाउंडेशन द्वारा जय पार्श्व पद्मोदय जैन माइनोरिटी एजूकेशन ट्रस्ट को 5 लाख 5 हजार रुपए का चेक भेंट किया गया। पदमचंद्रमुनिजी के 63वें जन्म दिवस के उपलक्ष में श्री श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ट्रस्ट चातुर्मास समिति हलसूरु बेंगलुरू के तत्वावधान में ऑल इंडिया जेपीपी जैन महिला फाउंडेशन द्वारा 26 जुलाई को पैलेस ग्राउंड स्थित प्रिंसेस श्राइन में होने वाले ज्ञानवर्धक अत्यंत रोचक कार्यक्रम जयमल प्रीमियर लीग 2026 के प्रवेश कूपन का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमोदजी भंडारी एवं अतिथि सुनील शर्मा का अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ बेंगलुरु शाखा के अध्यक्ष मीठालालजी लोढ़ा उपाध्यक्ष किरणचंदजी बोहरा, मंत्री मनोहरलालजी डूंगरवाल, कोषाध्यक्ष गौतमचंदजी मकाणा, सहमंत्री महेंद्रकुमारजी मेहता ने सम्मान किया। गुरु ज्येष्ठ पुष्कर जैन आराधना केंद्र के महामंत्री महावीरचंदजी मेहता ने भी विचार व्यक्त किये।


समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुणकुमारजी गोटावत, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रेवंतमलजी नाहर, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुक्मीचंदजी लुंकड़, चम्पालालजी बेताला, जेपीपी जैन महिला फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष आशाजी कटारिया सिकंद्राबाद, राष्ट्रीय मंत्री अमिताजी नाहर, बेंगलुरु शाखा के पूर्व अध्यक्ष मोहनलालजी कांकरिया, उत्तमचंदजी गादिया, वरिष्ठ सदस्य उगमराजजी बोहरा, उपधान आयोजन समिति के संयोजक राजेन्द्रकुमारजी नाहर, हलसूरु संघ के किशनलालजी कोठारी, सुनीलजी गादिया, चन्द्रप्रकाशजी मुथा, जेपीपी जैन गुरु सेवा समिति के अध्यक्ष आनंदजी सेठिया, जेएसपी श्रीश्रीमाल जैन फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी महेंद्रजी श्रीश्रीमाल, जेपीपी जैन महिला फाउंडेशन बेंगलूरु के चारों शाखाओं लक्ष्मीनारायणपुरम, हलसूरु, राजाजीनगर, बसवनगुड़ी एवं युवा फाउंडेशन के पदाधिकारी, उपस्थित थे। भोजन व्यवस्था में माणकचंदजी बोहरा, महेन्द्रकुमारजी चोरड़िया की विशेष सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया गया। संगीतकार नरेन्द्रजी वाणीगोता ने गुरु महिमा एवं संयम अनुमोदना के गीतों के साथ भावपूर्ण प्रस्तुतियों से सबको श्रद्धा से विभोर कर दिया। संचालन संघ मंत्री मनोहरलालजी डूंगरवाल ने किया। मीडिया प्रभारी जेके महावीरचंदजी चोरड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि 28 जून को जयमल संघ का राष्ट्रीय अधिवेशन सुब्रमणिनगर स्थित श्री बालाजी समुदाय भवन में आयोजित किया जायेगा एवं आचार्य पार्श्वचंद्रजी आदि ठाणा का हलसूरु में चातुर्मास प्रवेश 19 जुलाई को होगा।