गच्छाधिपति आचार्य युगभूषणसूरिश्वरजी (पंडित महाराज) एवं शताधिक साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा में वी.वी. पुरम स्थित महावीर धर्मशाला में छःरि पालित संघ के लाभार्थियों के सम्मानार्थ भव्य संघमाला महोत्सव का आयोजन किया गया।
आचार्य युगभूषणसूरिश्वरजी ने प्रवचन सभा में संघमाल की हित शिक्षाएं देते हुए बताया कि तीर्थंकर परमात्मा को संसार सागर भयानक और दुखों से भरा महाभ्रमण दिखा। उसमें संसारी जीवों को डूबने से बचाने के लिए उनके आलंबन के लिए उन्होनें धर्मातीर्थ की स्थापना की। तीर्थ स्थावर भी होते है, जंगम तीर्थ भी हैं। द्वादशांगी भी तीर्थ है, रत्नत्रयी भी तीर्थ है। इन तीर्थो की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। जिसे संसार में डूबने का भय नहीं लगता, उसको तीर्थ की जरूरत नहीं है। जिसे डूबने का भय नहीं है, उसे तैरने की जरूरत नहीं है। लेकिन जिसको संसार की भयानक स्थिति का बोध हो गया है, उसको तीर्थ के आलंबन की आवश्यकता है। छ’रि पालित संघ में आपने तीर्थंकर कथित धर्म की आराधना करके बहुत कर्मक्षय किये हैं। संघपतियो को संघमाला पहनाई जाती है । यह संघमाला/तीर्थमाला का दूसरा नाम गुणमाला है। जब तक आत्मा दोषों से मुक्त नहीं होता, तब तक मुक्ति नहीं मिलती। यह संघमाला जो आपको पहनाई है उसमें मंगलकामना समाहित है कि आप गुणों से व्याप्त होकर, दोषों को हटाकर मोक्षसुख प्राप्त करें।

दिक्षार्थी निर्मलाबेन डेढिया संघमाता को हितशिक्षा देते हुए कहा कि चारित्रसे ही मनुष्य भव सफल होता है। उनकी सालभर तपश्चर्या चालु रहती है। उनके घर में पति की और कुटुंब की उन्होने अच्छी सेवा और देखभाल की है। अब जीवनमें सभी जवाबदारियां संपन्न हो गई है और उनका मन संयम ग्रहण करने को तत्पर है तो इस अवसर पर वह प्रभु का दर्शाया संयम जीवन स्वीकार कर अच्छी तरह से पालन करके जल्दी से मोक्ष गति प्राप्त करें, ऐसी शुभ मंगल कामना करते हैं।
सभा के प्रारंभ में गुरु वंदना कर सुख साता पृच्छना की गई। पश्चात भगवान के समवशरण रुपी नाण के समक्ष परमात्मा की चहुँमुखी प्रतिमा एवं गुरु भगवंतों के सानिध्य में संघपति की सम्पूर्ण क्रिया संपन्न की गई।
छः री पालित संघ के मुख्य लाभार्थी निर्मलाबेन जवेरचंद डेढिया परिवार को संघमाला द्वारा सम्मान का लाभ दिलीपजी पिरगल परिवार ने लिया। गच्छाधिपति आचार्य युगभूषणसूरिश्वरजी के करकमलों से प्रथम संघ माला पहनने का लाभ डॉ. भास्करभाई शाह जस्मिनबेन शाह को मिला।

समारोह में गच्छाधिपति आचार्य युगभूषणसूरिश्वरजी ने निर्मलाबेन जवेरचंदजी डेढिया की दीक्षा के लिए 7 जुलाई का मुहूर्त घोषित किया जिस पर पूरा सभागार गुरु के जयकारों से गूंजायमान हो गया।
गुणवर्धक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ द्वारा सभी यात्रियों का अभिनंदन किया गया। साथ ही यात्रा संघ के 24 लाभार्थी परिवारों का गुण वर्धक संघ के ट्रस्टी विमलचंदजी गादिया, दिलीपकुमारजी पिरगल, उमेशभाई शाह, सोहनजी बोहरा, भावेशभाई शाह, रमेशचंदजी हरण, अशोकजी सेठ, विजयराजजी तलेसरा, सुरेशकुमारजी सेठ, सुरेशभाई, जयंतीलालजी मल्लेशा, कल्पेशजी चौहान, भरतजी बागरेचा, उत्तमचंदजी पालरेचा, ओमजी जैविनजी जैन, संजयजी बांठिया, कांतिलालजी गांधी मुथा ने स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया।
इस अवसर पर आचार्य अरिहंतसागरसूरीश्वरजी, आचार्य कल्पभूषणसूरीश्वरजी, उपाध्याय हर्षजीतविजयजी, प्रवर्तक गुणरत्नसागरजी तथा प्रवर्तिनी साध्वी कलानिधिश्रीजी आदि ठाणा की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन विक्रम गुरूजी एवं ट्रस्टी दिलीपजी पिरगल ने किया। संगीतकार कमलेश एंड पार्टी ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। प्रवचन सभा के पश्चात साधर्मिक भक्ति हुई।
Acharya Yugbhushansurishwarji | Gunvardhak Shwetamber Sangh | JYOT | Kalyan Mitra Parivar

