जैन समय। बेंगलूरु
कर्नाटक के मैसूर जिले के सरगूर तालुक स्थित सीडी हिल्स एवं हालुगड्डा क्षेत्र में 17 से 22 मार्च तक आयोजित शक्ति स्वरूपा श्री चिक्कादेवम्मा देवी जात्रा महोत्सव इस वर्ष अहिंसा और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा। वर्षों से चली आ रही पशुबलि की कुप्रथा पर पूर्ण विराम लगाते हुए हजारों निर्दोष पशुओं की बलि को सफलतापूर्वक रोका गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को पूरे राज्य में अहिंसा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
युगादि पर्व के अवसर पर जात्रा में विशेष पूजन, हवन, पारंपरिक धार्मिक विधि-विधानों तथा शोभायात्राओं का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देवी के दर्शन किए। पुलिस विभाग के अधिकारियों एवं प्रशासन ने निरंतर निगरानी रखते हुए यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी पशुबलि जैसी कोई घटना न हो।
विश्व प्राणी कल्याण मंडल, पशु-प्राणी बलि निर्मूलन जागृति महासंघ के अध्यक्ष दयानंदस्वामीजी के नेतृत्व में चलाए गए ‘अहिंसा-प्राणी दया संदेश महा-अभियान’ का इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।
दयानंदस्वामीजी ने जात्रा से पूर्व कई शांति बैठकें एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिनका सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला। भक्तों को समझाया कि सच्चा धर्म अहिंसा, करुणा और संवेदनशीलता में निहित है, न कि हिंसा और रक्तपात में। देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पशुबलि के स्थान पर उच्च श्रद्धा एवं भक्ति भावों के साथ नारियल, फल-फूल, हवन एवं सात्विक पूजा को अपनाना ही वास्तविक भक्ति-आराधना है। विशेष बात यह रही कि जात्रा आयोजकों और समिति के पदाधिकारियों ने भी पशुबलि रहित जात्रा के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस वर्ष जनवरी माह से अब तक चिक्कलूर में सिद्धप्पाजी जात्रा, बिलीगिरि में रंगनाथ स्वामी जात्रा, कपड़ी में राजप्पाजी जात्रा, तलकाडु में बंडारसम्मादेवी जात्रा, कोडगेरे में हनुमानजी का मंदिर, सरगूर तालुक में हालगड़ा एवं इटना में चिक्कदेवम्मा देवी जात्रा शिमसामारम्मादेवी जात्रा, कुरुबनाकट्टे श्री मंटेस्वामी मठा, चित्रदुर्गा में नायकनहट्टी में श्री गुरुतिप्पेरुद्रस्वामी जात्रा, दावणगेरे में दुग्गमादेवी जात्रा, रायचुर जिले में अंबादेवी मठ जात्रा, गदग जिले में बोम्मसागरदुर्गादेवी जात्रा, विजयापुर आदि जिलों में दयानंद स्वामीजी ने प्रशासन के सहयोग से कानूनी रुप से पशुबलि रुकवाकर देवालयों को वधालय बनने से बचाया।
श्रद्धालुओं को मिला सात्विकता शाकाहारी प्रसाद

जात्रा में श्रद्धालुओं के लिए शाकाहारी भोजन (प्रसाद) की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने पशुबलि का त्याग कर अहिंसा को अपनाया और सात्विक पूजा अर्चना के साथ पर्व मनाया।

श्री मातृछाया जैन महिला संगठन बना मजबूत आधार
इस अभियान की सफलता में श्री मातृछाया जैन महिला संगठन का विशेष योगदान रहा, जिसने आर्थिक सहयोग प्रदान कर इस अहिंसा आंदोलन को मजबूती दी।
संगठन की मार्गदर्शिका त्रिशलाजी कोठारी, अध्यक्ष ललिताजी नागोरी एवं मंत्री रेशमाजी बड़ोला ने बताया कि हमें गर्व है कि हम ऐसे पवित्र कार्य का हिस्सा बने, जिसमें निर्दोष जीवों की रक्षा हुई। यह महा-अभियान मानवता और करुणा की सच्ची सेवा है। भविष्य में भी ऐसे हर प्रयास के साथ खड़े रहेंगे, जो समाज में अहिंसा, जीवदया का वातावरण बनाने में आगे बढ़ाए।
ज्ञातव्य है कि मातृछाया जैन महिला संगठन ने चिक्कबल्लापुर जिले में रामसमुद्रा बांध के समीप ‘गौ तीर्थ श्री भगवान महावीर जीव रक्षा धाम’ में लगभग 4500 वर्ग फीट का विशाल गौ शेड का निर्माण भी कराया है एवं पानी की व्यवस्था हेतु टंकी के निर्माण में भी बड़ा सहयोग कर रहे हैं।
अभी इस माह पशुबलि रुकवाने के महा-अभियान में एवं श्रद्धालुओं को मांसाहार की जगह सात्विक शाकाहार का प्रसाद वितरण करने में स्थानीय लोगों के सहयोग के साथ ही वहाँ के यजमान चिन्ननायकजी के प्रमुख सहयोग के साथ ही मातृछाया जैन महिला संगठन, महावीरजी समदड़िया परिवार, सम्पतराजजी बागरेचा, सुनीलजी पटवा आदि का भी सहयोग रहा जिससे लाखों प्राणियों की रक्षा हुई।
बहुत बड़ा कार्य है जन मानस का हृदय परिवर्तन कर धर्म के नाम पर हिंसा बंद कराना : अशोकजी नागोरी
गौ तीर्थ भगवान महावीर जीव रक्षा धाम के उपाध्यक्ष अशोकजी नागोरी ने दयानंद स्वामीजी के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस दृढ़ता और संकल्प के साथ स्वामीजी जनसमुदाय के बीच जाकर उन्हें सही प्रेरणा देकर धर्म के नाम पर होने वाली पशुबलि को कानूनी रुप से रुकवाने हेतु अहिंसा का यह अभियान चलाया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। इसमें प्रशासन एवं पुलिस विभाग का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है और मंदिर के प्रबंधकों, पुजारियों आदि भी पशुबलि के घोर पाप एवं दुष्परिणामों को जानकर सात्विक रुप से पूजा अर्चना करने की प्रवृत्ति को अपना रहे हैं। इसके अत्यंत दूरगामी सत्परिणाम प्राप्त होंगे। हम कितने जीवों को बचा सकते हैं? और पाल सकते हैं?
महत्वपूर्ण है कि जन जन में चेतना जागे और वे स्वयं जीवों की हिंसा छोड़ दे। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और समाज के दानवीर लोगों से अपील की कि वे इस पवित्र अभियान से जुड़कर पशुबलि मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
स्वामीजी ने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार इस जात्रा में हजारों पशुओं की बलि रोकी गई, उसी प्रकार पूरे देश में अहिंसा का संदेश फैलाकर आने वाले समय में ऐसी कुप्रथाओं को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। जन मानस में जीवों के प्रति दया एवं करुणा का भाव निर्मित करने से ही धर्म सुरक्षित रहेगा।

