जैन समय। बेंगलूरु
भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की रही है। सारा विश्व अपना परिवार है। भारत की गौरवशाली परम्परा एक दूसरे के सहयोग, परस्पर सद्भावना और गुणानुवाद की रही है। गुणीयों का सम्मान आवश्यक है। उपरोक्त विचार अखिल भारतीय ओसवाल परिषद द्वारा आयोजित सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल थावरचंदजी गहलोत ने अपने वक्तव्य में प्रकट किये। उन्होंने जैन समाज के उदारता, दया, परोपकार व अहिंसा की विशेषता की सराहना करते हुए कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत जीओ और जीने दो विश्व शांति का मूल मंत्र। उन्होंने अखिल भारतीय ओसवाल परिषद द्वारा समाज सेवी संस्थाओं और व्यक्तियों को सम्मानित किये जाने की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में हमेशा गुणवानों का आदर होता है। निःस्वार्थ सेवा करने वालों को प्रोत्साहित करना हमारा दायित्व है।
परिषद के फाउंडर चेयरमैन रायचंदजी खटेड़ ने स्वागत भाषण दिया। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोकजी नागोरी ने कहा कि इस संस्था द्वारा सामाजिक धार्मिक शिक्षा चिकित्सा एवं मानव सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वालों को अलंकरण सहित सम्मानित किया जाता है। पूर्व में 19 सम्मान समारोह में अब तक 15 महान संतों, 128 विशिष्ट व्यक्तियों एवं 61 सामाजिक संस्थाओं को सम्मानित किया जा चुका है। राज्यपाल ने मुख्य प्रायोजक अशोककुमारजी छाजेड़, सह प्रायोजक कमलजी सिपानी, सह प्रायोजक धर्मचंदजी बंबकी को स्मृति चिन्ह प्रदान किया।
मुख्य प्रायोजक परिवार की ओर से शकुंतलाजी अशोककुमारजी छाजेड़ ने राज्यपाल के सरल स्वभाव एवं विनम्र व्यवहार का जिक्र किया। मीठालालजी पावेचा ने राज्यपाल के समाज के प्रति योगदान का वर्णन किया। संदीपजी बरड़िया ने गीतों की प्रस्तुति दी। महामंत्री विजयकुमारजी सुराना ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन में उपाध्यक्ष राजेन्द्रकुमारजी मुणोत, कोषाध्यक्ष
वीरेंद्रजी नाहर, सहमंत्री हंसराजजी गाँधी, सहमंत्री महेशकुमारजी चौधरी, कार्यकारिणी सदस्य एम. सी. बलदोटाजी, रमेशचंदजी दक, महावीरचंदजी मेहता की सराहनीय सेवाएं रही। जैन दोस्ती फेडरेशन ने सुंदर व्यवस्था संभाली।
विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान
ओसवाल परिषद की ओर से राज्यपाल माननीय थावरचंदजी गहलोत द्वारा प्रकाशचंदजी राठौड़, पुखराजजी मेहता, पदमराजजी मेहता, धर्मचंदजी बंबकी, अशोककुमारजी सुराणा, डॉ रमेशजी गादिया को समाज रत्न अलंकरण, शकुंतलाजी छाजेड़, स्वर्णमालाजी पोकरना, किरणजी लूणिया एवं स्नेहलताजी बरड़िया को नारी रत्न अलंकरण प्रदान किया।
गौतमचंदजी नाहर को ओसवाल रत्न, एस. के. मेहता को मरणोपरांत ओसवाल रत्न का अलंकरण प्रदान किया गया।

