जैन समय। बेंगलूरु
गुरु ज्येष्ठ पुष्कर जैन आराधना केन्द्र में पंडित रत्न श्री ज्ञानमुनिजी म.सा. उप प्रवर्तिनी साध्वी श्री सत्यप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में आदिनाथ ऋषभदेव भगवान के जन्म कल्याणक, दीक्षा कल्याणक के पावन दिवस पर श्रेयांस पारणा समिति के तत्वावधान में आयोजित वर्षीतप प्रारंभ प्रत्याख्यान कार्यक्रम में श्रावक श्राविकाओं ने बड़ी संख्या में तप आराधना प्रारंभ करते हुए वर्षीतप के प्रत्याख्यान पंडित रत्न ज्ञानमुनिजी के मुखारविंद से ग्रहण किए।
लगभग 400 दिनों तक चलने वाली तेरह महीने की यह वर्षीतप आराधना चैत्र बदी अष्टमी से प्रारंभ होकर आगामी वर्ष अक्षय तृतीया तिथि तक चलेगी। अपने संबोधन में ज्ञानमुनिजी, साध्वी सत्यप्रभाश्रीजी, साध्वी तरुणशीलाश्रीजी ने कहा कि जैन धर्म में तप का विशिष्ट महत्व है। तप जप करने से कर्मों की निर्जरा होती है और हमारी आत्मा पवित्र, निर्मल, शुद्ध बनती है। शूरवीर ही तप कर सकते हैं। हमारे मन को मजबूत और हमारी भावना को दृढ़ करके ही तप आराधना की जा सकती है। तप विषय, विकार, कषाय, वासना और कर्म काटने कि परम औषधि है।
श्रेयांस पारणा समिति के चेयरमैन रमेशचंदजी सियाल एवं सह चेयरमैन मीठालालजी लोढ़ा ने सभी श्रद्धालुओं, तपस्वियों का स्वागत किया और अक्षय तृतीया पारणा महोत्सव आचार्य पार्श्वचंद्रजी, एवं एस.एस. समणी मार्ग के प्रारंभकर्ता डॉ. पदमचंद्रजी के सानिध्य में त्रिपुरा वासिनी के प्रांगण में 400 से अधिक पारणा की तैयारियां किये जाने की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन कर्नाटक जैन स्वाध्याय संघ के संयोजक शांतीलालजी बोहरा ने किया। गुरु ज्येष्ठ पुष्कर जैन आराधना केन्द्र के महामंत्री महावीरचंदजी मेहता ने श्रेयांस पारणा समिति द्वारा की जा रही पारणे की सुंदर व्यवस्था की सराहना की। समिति के प्रवक्ता जे.के. महावीरचंदजी चोरड़िया ने बताया कि इस अवसर पर 38 उदारमनाओं ने एकांतर पारणा व्यवस्था के वार्षिक सहयोगी बनने की घोषणा की।
श्रेयांस पारणा समिति के तत्वावधान में वर्षीतप आराधकों ने ग्रहण किये सामूहिक प्रत्याख्यान

