आदरणीय दादाजी सेठ साहब श्रीमान भेंरूदानजी सिपानी दादीजी आदरणीय श्रीमती धनीदेवीजी और परम पूज्य पिताजी श्रीमान सोहनलालजी एवं ममतामयी मातेश्वरी श्रीमती जेठीदेवी की छत्र छाया में प्रसिध्दि पाने वाले योग्य और गुणवान, युवा उद्योगपति, कर्नाटक की राजधानी फूलों और कंप्यूटर की नगरी बेंगलोर के निवासी श्री कमलजी सिपानी समाज के कर्मठ कार्यकर्ता, शासननिष्ठ, समाजसेवी, धर्मनिष्ठ, श्रध्दाशील और कत्तर्व्य परायण एवं युवा जगत की शान हैं।

श्री कमलजी सिपानी की समाज के अनेक वयोवृध्दों, नेताओं, साथियों – मित्रों, व्यापारियों, समाज सेवी संस्थाओं – मंडलों – संघों ने, गुरूओं, संत-सतियों, आचार्यों ने भूरी-भूरी सराहना की हैं | जन – जन को सरल और सुबोध शैली में आगमाधार पर जैंनत्व का सार पुस्तक के आकार में देने वाले, स्वतंत्रता और देशभक्ति के प्रबल के प्रकार, स्वदेशी और खादी के हिमायती, जैनाचार्य श्री जवाहरलालजी म.सा. के आप परम भक्त हैं | शांत क्रांति के अग्रदूत आचार्य श्री गणेशीलालजी म.सा के आप परम उपासक हैं | समता विभूति, आगम पुरूष, आचार्य श्री नानालालजी म.सा आपके आस्था के केन्द्र हैं | आगमज्ञ, व्यसन मुक्ति के प्रबल प्रेरक आचार्य श्री रामलाल जी म.सा ने आपके जीवन को एक नया मोड़ प्रदान किया हैं |
आचार्य श्री रामलालजी म.सा. का वर्ष 2014 में बेंगलोर में अलोकिक चातुर्मास संपन्न हुआ जो पूरे भारत में सर्वश्रेष्ठ चातुर्मास घोषित हुआ । आप उस चातुर्मास समिति के चेयरमेन थे। आप वर्तमान में श्री साधुमार्गी जैन संघ बेंगलोर के मार्गदर्शक हैं।
संघ की धार्मिक और अन्य गतिविधियों को आगे बढ़ाने में हमेशा आगे रहते हैं |

श्री कमलजी कार्य करते हुए सेवा पथ पर आगे से आगे बढ़ते जा रहे हैं | धर्म के प्रति आस्था और समर्पण की भावना इन्हें अपने प्रतिपल वन्दनीय परम पूज्य पिताजी श्रध्देय श्री सोहनलालजी सिपानी और ममतामयी, करूणामयी, स्नेह और वात्सल्या की भण्डार मातेश्वरी जेठीदेवीजी सिपानी से विरासत में मिले हैं | उनकी सहानुभूति और भाव भक्ति इनके रग – रग में समायी हुई हैं | इनमें आत्मीय स्नेह और करूणा के भाव हैं | इनमें अभूतपूर्व शक्ति हैं, लगन है, उत्साह हैं, जोश है, साहस है, सही कार्य करने की एक अलग ही तमन्ना हैं |
इनकी कार्य शैली में जीवन की एक चमक है, एक आभा है, एक भाव – चित्र है | जिन्हें आप बनाते रहते है और कार्य करते है | इनके चित्रों में जीवन की गहराई, जीवन का उतार – चढ़ाव व अनेक विचारों में, समाज – देश – धर्म की उन्नति और विकास के दृश्य है |
आकर्षक व्यक्तित्व, गेहूँआ वर्ण, गोल आकृति, मुस्कराते नयन, फबती नुकीली नाल, बोलती बाँहे, कुछ गुनगुनाते, कुछ कहते, कुछ सुनते, कूछ मुस्कराते, कुछ विचार – चिंतन- मनन करते ज्ञान – दर्शन और धर्मध्यान में मग्न , धर्म आराधना करते देखे गये है कमलजी को | ये अच्छा बोलते है | अच्छा लिखते हैं | इनमें ज्ञान और अनुभव है | उच्च विचार एवं महान कार्ययोजना है ।
स्वभाव से ये सरल, मृदु, उदार, स्नेहशील, दया, करूणा, वात्सल्य से भरे हुए हैं | इनका दिल गुलाब की महक – सा खुशबूदार है | इनका हृदय निर्मल पानी के झरने के समान पवित्र है | इनका मनो- मस्तिष्क आकाश से भी विशाल और सागर से भी गहरा है | हमेशा ये चलते- फिरते, खाते – पीते, उठते – बैठते, सोते – जागते, व्यापार और धर्मध्यान करते समता का ही ध्यान रखते है | ये मन मोहक आकर्षक व्यक्तित्व के धनी हैं | आप उदार हृदयी हैं | आप सेवा रस से हमेशा भरे हुए हैं | मानवता के सच्चे अर्थो में पूजारी हैं | आप इसी भाव से सभी के मन भावन और चेहते बने हुए हैं |

साधु-साध्वीजी, संत महात्मा इनके केन्द्र बिन्दु है |समाज के गौरव युवा है | ऐसे जनप्रिय श्री कमलजी जन कल्याण के सद्कार्यों में लगे हुए हैं | इन्होँने अपना धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक क्षेत्र पुरूषार्थ से बनाया और संघ, समाज में प्रतिष्ठित स्थान बनाया हैं |
इनके अंतर में एक स्नेह धारा प्रवाहित होती रहती हैं, वहीं से ये साहस, हिम्मत, ऊर्जा और उत्साह प्राप्त करते हैं। ये हमेशा शिक्षा, चिकित्सा, समाज सुधार और समाजोत्थान के कार्य में तत्पर रहतें हैं। आज का बालक भविश्य का पालक है और आज की बालिका भविश्य की माँ है, अतः बालक और बालिकाओं में व्यवहारिक शिक्षण की साथ – साथ धार्मिक संस्कार, नैतिक भावना और आध्यात्मिक शिक्षण की नितांत आवश्यकता है। क्योंकि आने वाले सुनहरे भविष्य का भार उन्हीं के कंधों पर आने वाला है।
नारी शिक्षा, समानता, समन्वय और स्व- अधिकारों के प्रबल हिमायती, व्यापक और उदार हृदयी, विशालमना, कत्तव्यनिष्ठ, व्यवहार कुशल, प्रतिपल जागरूक, बात के धनी, समय के पाबंद और मधुर शब्द बोलने वाले श्री कमलजी सिपानी सभी के प्रिय है। श्री कमलजी का कहना है कि जरा ठहरो, कोई काम के लिए जल्दी मत करो, धैर्य से सोच – समझकर काम करो, विवेक रखो, शांति, संतोश और समता से ही सभी कार्य में सफलता प्राप्त होती हैं। क्योंकि अपने – अपने स्थान पर सभी श्रेष्ठ हैं। ये गुणों के पारखी है। ये स्वयं गुणी है, ये गुणियों का आदर – मान – सम्मान – सत्कार करना समझते है और इन्हें सभी में गुण ही दिखाई देते हैं। अपने व्यवसाय – उद्योग में भी आप बहुत चमके है। खूब प्रतिष्ठा पाइ है। खूब नाम कमाया हैं। ईमानदारी, कर्त्तव्यनिष्ठा, और प्रामाणिकता के साथ व्यापार करने वाले और स्व – जीवन जीने वाले है श्री कमलजी सिपानी। आज के इस भौतिक विलासपूर्ण वातावतण में परिवार, समाज, धर्म, देश को ऐसे ही युवावर्ग की आवष्यकता हैं। जो संघ, समाज, धर्म, और देश के लिए कुछ कर सके। नव चेतना पैदा कर सही जागृति ला सके। रूढ़ियों को तोड़ कर आडंबर मिटा सके। इनकी मान्यता है कि आत्मबल ही सब कुछ है। अंतरात्मा की आवाज ही सर्वापरि है।

श्री कमलजी सिपानी की हार्दिक इच्छा है कि धर्म का जन – जन और घर – घर में प्रचार हो, युवक – युवतियाँ मर्यादा में रहकर संस्कारशील और विवेकवान् बने, धर्मवान् बने, नम्र और अनुशासन प्रिय बने। देश, धर्म, समाज, संघ और सार्थक कार्य करे। जिससे जन – जीवन में विश्वास बढ़े। आपस में एक – दूसरे के प्रति समन्वय, समता, भाईचारा और अपनत्व का विकास हो।
हर पल धार्मिक और आध्यात्मिक तथा भारतीय संस्कृति और सभ्यता को स्व जीवन का अभिन्न अंग बनाने वाले श्री कमलजी सिपानी आज भी अपने कर्त्तव्य मार्ग में आगे बढ़ रहे हैं। सद्चिंतन ही इनके जीवन की अमृतधारा है।
तीर्थंकरों, गणधरों, संत – सतियों के गुणों को जीवन में आत्मसात् कर समता विभूति आचार्य श्री नानालालजी म. सा. के शासन में और व्यसन मुक्ति के प्रेणता, आचार्य श्री रामलालजी म.सा. के शासन में पूरी निष्ठा के समर्पित हैं।
अनुशासन प्रिय, शांत – क्रांति के अग्रदूत आचार्य गणेशीलालजी म.सा. कके पट्टधर विश्व शांति के मसीहा, आचार्य श्री नालालाजी म.सा. और तरूण तपस्वी, आचार्य श्री रामलाल जी म.सा. की श्री कमलजी सिपानी पर जबरदस्त छाप हैं। आगम पुरूष आचार्य श्री नानालालजी म.सा. ने उदारहृदयी, समय की मर्यादा को समझने वाले, जन – जन के चहेते, बात नहीं काम में विश्वास रखने वाले श्री कमलजी को करीब से देखा है, उन्हें भली – भाँति परखा है। इसी आशा और विश्वास के साथ धर्मपाल प्रतिबोधक, समता विभूति आचार्य श्री नानालालाजी म.सा. ने इनके जीवन में समता की भावना का बीज डाला है और समता की व्यापकता भरी धर्म और संघ के प्रति स्नेह जगाया है।
श्रमण भगवान प्रभु महावीर के शासन को दिपाने वाले, सुधर्मा स्वामी के पाट को अक्षुण्ण बनाये रखने वाले, चतुर्विध संघ के नायक, आगम पुरूश, जिन शासन सरोवर के राजहंस, आचार्य प्रवर श्री नानेश पट्टधर, आगमज्ञ व्यसन मुक्ति के प्रबल प्रेरक, प्रशांतमना, तरूण तपस्वी तपोमूर्ति, सिरीवाल प्रतिबोधक, आचार्य श्री रामलालजी म.सा. के भी आप बहुत करीब रहे है, उनसे भी आपने सम्यक् जीवन जीने के मूल्यों का महत्व समझा है।
इनमें क्षमता है, सम्यग् – विचार और शुध्द भाव है। विशुध्द आचार – विचार और शुध्द खान – पान वाले इस युवा होनहार युवक ने अपने पिताश्री के गौरव को आगे बढ़ाया है। आपने अपने खानदान की मान – मर्यादा उज्जवल बनाए रखने में चार चांद लगाये है। सात्पाहिक प्रति रविवार के दिन प्रातः सामूहिक नमस्कार मंत्र जाप और प्रार्थना का कार्यक्रम गत 18 वर्षों से चल रहा हैं, उसमें घर – परिवार के सभी सदस्य उपस्थित होते हैं और धर्मिक और आध्यात्मिक अनुश्ठान से द्वारा अपनी आत्मा को सम्यक् ज्ञान – दर्शन – चारित्र – तप की ओर अग्रसर करते हैं।

धर्मप्रेमी और शासन प्रिय, गुरू भक्त कमलजी समय के पाबन्द और बात के धनी है। आप चार भाई है। सबसे बड़े श्री सुन्दरलालजी सिपानी, दूसरे नम्बर पर में श्री राजुकुमारजी सिपानी, तीसरे नम्बर पर आप स्वयं और चौथे नम्बर पर श्री विमलचंदजी सिपानी है, आप सभी सुन्दर और सात्विक विचारों के धनी है। आप प्रतिदिन अपने पूज्य माता – पिता और अपने से बड़ों को प्रणाम करते हैं, आप ही नहीं अपितु घर के सभी सदस्यों के इस प्रकार का नियम है। जब भी आपको बेंगलोर से बाहर जाने का कोई कार्य हो तो अपने गुरुदेव का सुमिरण करके ही प्रस्थान करते हैं।
आपकी एवं आपके परिवार की सफलता का सही राज यह है कि आप जब भी किसी भी प्रकार का नया कार्य प्रारम्भ करते है तो सर्व प्रथम आचार्य भगवंत का मांगलिक लेकर फिर नया कार्य शुरू करते हैं । धार्मिक और आध्यात्मिक विचारों से युक्त आपके एक बहन श्रीमती सरलाबाई बेताला है जो श्रीमान् प्रकाशचंदजी बेताल की धर्मपत्नी है। आपकी धर्मपत्नी सुश्राविका श्रीमती विमलादेवी सिपानी एक आदर्श गृहिणी है। तप – त्याग, धर्म – ध्यान में रत रहते हुये प्रतिदिन नियमित 2 घण्टे का स्वाध्याय अवश्य करती हैं। सम्यक् ज्ञान की आराधना करते हुये आपने सामायिक प्रतिक्रमण के साथ दशवैकालिक सूत्र उत्तारध्ययन सूत्र, नंदी सूत्र आदि कई आगमों का अध्ययन किया है। इन्हें पच्चीस बोल आदि अन्य कई थोकडे कण्ठस्थ हैं। आप प्रतिदिन कम से कम 5 -6 सामायिक नित्य करती हैं। 3, 5, 6, 8, 9,15 उपवास तक की तपस्या श्रीमती विमला सिपानी ने की है। तप में भी हमेशा आप आगे रहती है। अतः आप तप वीरागंना और आदर्श महिला रत्न है।
श्रमण भगवान प्रभु महावीर स्वामी से प्रार्थना करते है कि आप इसी प्रकार संघ, समाज, धर्म और देश के विकास में तन – मन – धन से अपना सहयोग प्रदान करते हुए जिनशासन की सेवा में अपना अमूल्य समय और जीवन लगावे। अपने अर्थ का अधिक से अधिक सदुपयोग दीन – दुखियों की सेवा करने में और साधर्मिक बन्धओं की सहायता करते हुए अपने सद्कार्य द्वारा जीवन में आगे से आगे बढ़ते रहे। आपके मार्गदर्शन एवं विशाल सहयोग से जैन समय द्वारा जैन एकता एवं जैन धर्म को जन जन तक पहुँचाने का महाअभियान गतिमान है।

