‘लोभ’ – जो कभी तृप्त नहीं होने देता
आत्मा स्वभाव से शुद्ध और ज्ञानमय है, परंतु कषायों के कारण वह कर्मों से आच्छादित हो जाती है।क्रोध, मान, माया…
Jain Samay | ‘व्यवहार में धर्म’ – by Kamal Sipani
आत्मा स्वभाव से शुद्ध और ज्ञानमय है, परंतु कषायों के कारण वह कर्मों से आच्छादित हो जाती है।क्रोध, मान, माया…
जैन दर्शन में आत्मा को स्वभावतः शुद्ध, बुद्ध और मुक्त माना गया है। किंतु अज्ञानवश जब आत्मा राग-द्वेष और कषायों…