संघवी पारसमलजी लूणिया

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एक महान व्यक्तित्व के धनी संघवी पारसमलजी लूणिया

‘मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है ।।

‘ दृढ़ संकल्प एवं मिलनसारिता के जीवंत प्रतीक, विशिष्ट एवं महान व्यक्तित्य के धनी हैं राजस्थान में बिलावास मूल के कर्नाटक में बेंगलूरु निवासी सुप्रसिद्ध श्रेष्ठिवर्य संघवी पारसमलजी लुणिया। स्व. श्री पुखराजजी स्व. अंचीबाई तुणिया के सुपुत्र सुंदर देहयष्टि, गौरवर्ण, सदैव प्रसन्न पदन, अत्ति आकर्षक व्यक्तित्व वाले संघवी पारसमलजी सुणिया बचपन से ही विशिष्ट प्रतिभा के धनी हैं। व्यवहार कुशलता एवं धार्मिक संस्कार उन्हें बाल्यकाल से ही मिलते रहे जो वर्तमान में भी एक प्रबल शक्ति की तरह इनके साथ है। आप मात्र 15 वर्ष की उम्र में अपने भाग्य को चमकाने बेंगलूरु में पधारे। कुशाग्र बुद्धि के बनी पारसमलजी ने भारतीय विद्याशाला में अपनी एस.एस.एल.सी. की शिक्षा पूर्ण की। आप वहाँ के Rank Student थे। आपके हृदय में कुछ बड़ा करने का लक्ष्य किशोर अवस्था से ही बन गया। इसलिए आपने बड़ी सगन एवं मेहनत के साथ अपने बहनोईसा मंगलचंदजी लुंकड़ के यहाँ गहन अनुभव प्राप्त किया और आपने सिर्फ 24 वर्ष की उम्र में महालक्ष्मी इलेक्ट्रीकल्स नाम से स्वयं का व्यवसाय चिकपेट में प्रारंभ किया।

अपने मधुर व्यवहार, कड़ी मेहनत एवं ईमानदारी से आपने शीघ्र ही इलेक्ट्रिक मार्केट में विशिष्ट प्रतिष्ठा प्राप्त कर ली। अभी वर्तमान में चामराजपेट में नीडल मार्केटिंग के नाग से आपका बहुत बड़ा व्यवसाय है। आपका मंगल परिणय भावी राजस्थान मूल के स्व. सुगनचंदजी स्व. उगमाबाई ओस्तवाल की सुपुत्री यथा नाम तथा गुण सरस्वतीबाई के साथ संपन्न हुआ। आपके सुखमय वैवाहिक जीवन की स्वर्ण जयन्ति सन् 2016 में धून धाम से मनाई गई। आपके सुपुत्र सुपुत्रवधु राकेशजी संगीताबाई लुणिया भी आपके उच्च सुसंस्कारों से सुशोभित है और अपने कुशल व्यवहार से समाजजनों के हृदय में विशेष प्रतिष्ठित स्थान रखते हैं। आपकी दोनों सुपुत्रियों-जंवाईसा उषाबाई प्रवीणजी भंडारी (जोधपुर) बेंगलूरु एवं चन्द्राबाई महेन्द्रकुमारजी बोहरा (सोजत रोड) बेंगलूरु भी अत्यंत मिलनसार हैं।

आपकी 21 वर्षीय पौत्री वृत्तिजी लूणिया बीकॉम एवं फाईनंन्स अंतिम वर्ष तथा 19 वर्षीय पौत्र दीपंशजी लुणिया बीबीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं एवं दोनों ही अपने कॉलेज के Rank Student है। आपका जीवन बहुत संघर्षमय रहा। आपने अपनी मेहनत, लगन, कार्यकुशलता, मधुर व्यवहार एवं मधुर भाषिता के बल पर उन्नति के शिखर को प्राप्त किया है। बेंगलूरु महानगर में जैन समाज का जायद ही कोई व्यक्ति होगा जो आपसे परिचित न हो। आपने अपनी निःस्वार्थ सेवा से हर व्यक्ति के हृदय में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। आप सच्चे समाज रत्न है। आप दानवीर है, जीवदया प्रेमी है। आप विनम्रता, सरलता, सहनशीलता की जीती जागती मूरत है। आप अनेक सामाजिक एवं समाज सेवी संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। श्री वासुपूज्य स्वामी जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट के आप ट्रस्टी है।

बीबीयूएल जैन विद्यालय में आपने अपनी ओर से कमरे का निर्माण कराया है। भगवान महावीर जैन हॉस्पीटल में कमरे का निर्माण कराया है। सम्मेद शिखरणी, राजगृही, पावापुरी, शंखेश्वर, शकुंजय पालीताणा, नागेश्वर, मोहनखेड़ा, कुलपाकजी आदि सुप्रसिद्ध तीयों की दि. 27.9.2017 से 9.10.2017 तक 13 दिवसीय भव्य संघ तीर्थ यात्रा के आप प्रायोजक रहे हैं। जीवदया एवं मानवता को सर्वोपरि माननेवाले एवं इस हेतु सहयोग में सदैव तत्पर संघवी पारसमलजी लूणिया बढ़चढ़कर सेवा कार्यों में सहयोग करते हैं। आपकी भावना है कि लोग अपने स्वार्थ एवं अहंकार को छोड़कर जिनशासन की उन्नति का प्रयास करें। हम छोटे छोटे मतभेदों में नहीं उलझें और हिल मिलकर प्रभु महावीर के महान सिद्धांतों को जन जन तक पहुँचाने का प्रयास करें।

आपके तीन बहन बहनोई भंवरीबाई मंगलचंदजी लुंकड़, सुवाबाई नेमीचंदजी रांका, शान्तिबाई शेवमलजी मुचा है। आप अपने बहनोईसा स्व. मंगलचंदजी लुंकड़ को अपने जीवन में सफलता का बहुत श्रेय देते हैं कि उन्होंने कड़ी मेहनत सिखाई, नम्रता सिखाई, हर काम करना सिखाया, आत्म निर्भरता सिखाई जिसकी वजह से आप शून्य से सफलता के शिखर तक पहुंचे आपका कहना है कि जीवन में कभी भी किसी भी परिस्थिति से घबराना नहीं चाहिए। हिम्मत रखो और हर स्थिति का दृढ़ता से मुकाबला करो। कड़ी मेहनत और अच्छी भावना के साथ कार्य करते रहने से दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदलते देर नहीं लगती है। आवश्यकता है ऊँचा मनोबल, अच्छी सोच, सही व्यवहार एवं निरंतर पुरुषार्थ की।

500 जैन परिवारों को संवारने का श्रेय है पारसमलजी लूणिया को

करीब 500 जैन परिवारों में आयने दाम्पत्य संबंध संपन्न कराए जो वर्तमान परिस्थितियों में समाज पर एक बहुत बड़ा उपकार है। संघवी पारसमलजी लुणिया परिवार अतिथि सत्कार में अत्यंत अग्रणी है। दूर दूर के रिश्तेदारों से भी आपकी मिलनसारिता इतनी है कि प्रायः प्रतिदिन 8-10 अतिथियों का आपके निवास पर पदार्पण बना रहता है। आपके आतिथ्य सत्कार की सभी मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं। आप सम्प्रदायवाद से कोसों दूर हैं। जैन एकता के पक्षचर आप निष्पक्ष रूप से सभी साधु साध्वी भगवंतों की सेवा हेतु तत्पर रहते हैं। आप जिनवाणी के पिपासु है, संत प्रवचन के रसिक है। एक अत्यंत प्रेरक जीवन है। आप दानवीर हैं एवं गुप्तदान में विशेष रुचि है। आपके हृदय में स्वधर्मी बंधुओं के प्रति प्रेम एवं वात्सल्य का झरना प्रवाहित होता है। आपने अनेक परिवारों को ऊँचा उठाया है।

जैन समय ‘अनमोल रत्न’ हैं पारसमलजी लूणिया

विराट व्यक्तित्व के धनी, जैन जगत की शान, उदारमना, मिलनसार जैन समय के ‘अनमोल रत्न’ संघवी पारसमलजी लुणिया की रग-रग में जैन धर्म की प्रभावना की प्रबलतम भावना है। इसी भावना से आप जैन समय के विश्व व्यापी धर्मप्रचार अभियान को गति देने हेतु जैन समय के स्तंभ सहयोगी वनं हैं। आपका मानना है कि जैन धर्म का पूरे विश्व में विज्ञाल स्तर पर प्रचार प्रसार होना चाहिये। ‘जैन समय’ के विश्वव्यापी स्तर पर जैनत्व के प्रचार प्रसार एवं समग्र जैन समाज को एक दूसरे के साथ जोड़ने के लक्ष्य से आप बहुत प्रभावित हुये। और हमारे स्तंभसहयोगी बने। जैन समय के स्तम्भ सहयोगी बनकर आपने हमारे उत्साह को अनेक गुणा बढ़ाया है। आपके उदार सष्ठयोग से जैन समय द्वारा सकल जैन समाज को नई Connectivity, Worldwide Unity एवं Information के महाअभियान को बड़ी शक्ति मिलेगी। हम आपके पूरे परिवार के लिये आरोग्यमव, धर्ममय, सर्व सुखमय जीवन की यशस्वी मंगलकामनायें करते हुए शत शत आभार प्रदर्शित करते हैं।

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