मानवता की अलख जगाने वाले परोपकारी, उदारमना और कुशल नैतृत्व क्षमता के धनी तन, मन, धन के साथ शासन सेवा में समर्पित अनमोल रत्न मूलचंदजी नाहर
जैन सिद्धांतों एवं अनेक सद्ग्रंथों की मूल भावना को अपने आचरण में उतारने वाले महान व्यक्तित्व के धनी मूलचन्दजी नाहर नर सेवा नारायण सेवा को पूर्णरूपेण स्वीकार और अंगीकार करने के साथ ही ‘परोपकाराय पुण्याय’ को अपने जीयन का ध्येय बनाया है। रार्मीगजी माहूर कल्याण मित्र परिवार की एक कड़ी है ‘शारानरोधी ‘युवामौरव मूलचन्दजी नाहर । राजस्थान की भिक्षु भूमि मारवाड़ के पाली जिले में स्थित जाणुन्दा ग्राम के सौरेमलजी और विदामीबाई गाहर के प्रथम पुत्र चम्पालालजी, द्वितीय पुत्र मुलचन्दजी एवं तृतीय पुत्र रमेशचंदजी नाहर इस पुण्य घरा पर आए। मूलचंदजी नाहर बाल्यकाल से ही अद्भुत प्रतिभा के बनी रहे हैं। आपकी प्रारंभिक शिक्षा जाजुन्या के सरकारी स्कूल एवं आऊया में हुई। तदुपरांत राणावास स्थित सुमति शिक्षा सदन से नौवीं और दसवीं की पढ़ाई के साथ-साथ बार्मिक संस्कारों की शिक्षा मी प्राप्त की। आपके चाचा फैसूलालजी नाहर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बेंगलूरु आए। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने दवाइयों की दुनिया में कदम रखे और अच्छा व्यापार स्थापित कर तिचा। इसमें उन्हें मिश्रीभलजी सुराणा का भी सहयोग प्राप्त हुआ। इस अवधि में पीसूलालजी नाहर ने अपने परिजनों धनराजजी नाहर, मदनराजजी नाहर, देवराजजी नाहर और फिर मूलवन्दजी नाहर को महेन्द्रा हुग हाउस में अपने साथ जोड़ लिया। वहां दवाइयों के फार्टन की पैकिंग तथा डिस्पैटिंग करते हुए बवाओं के व्यवसाय का ककहरा सीखा और अपनी बुन और लगन से आगे बढ़ते रहे। व्यवसाय में अभिवृद्धि होने पर 1975 में घीसूलालजी नाहर ने एक नई फर्म महेन्द्रा ड्रग एजेंसीज प्रारंभ कर दी। महेन्द्रा ड्रग एजेंसीज पौसूलालजी नाहर, अरविन्दजी नाहर, देवराजजी नाहर और मूलचन्दजी नाहर की भागीदारी में चतती रही। कालांतर में पीसूलालजी नाहर और अरविन्दजी नाहर ने महेन्द्रा ड्रग एजेंसीज का अपना शेयर देवराजजी नाहर और मूलचन्दजी नाहर को 1988 में सौंप दिया। राम और लक्ष्नग जैसी जोड़ी के रूप में सुप्रसिद्ध आप दोनों ने व्यवसाय को प्रगति के नए शिखर पहुँचाने के साथ अपनी उदारता से पूरे भारत में यश कीर्ति प्राप्त की है। गृहस्थाश्रग में प्रवेश 10 मई 1978 को शुभ पड़ी में धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति से ओतप्रोत सुसंस्कारी शशिकलाजी नाहर के साथ आपका शुभविवाह संपत्र हुआ। शशिकलाजी का त्याग, तपस्या के प्रति विशेष झुञ्जव रहा। अर्द्धांगिनी का यही समर्पण और सहयोग का भाव मूलचन्दजी नाहर के सामाजिक एवं धार्मिक जीवन में प्रदेश करने का हेतु बना। आपके जीयन के नये अध्याय के साथ एक पुत्र रत्न विकासजी और लक्ष्मी स्वरूपा दो पुत्रियों विजेताजी व वंदनाजी प्राप्त हुई।

मूलचन्दजी नाहर को प्रथम दृष्टि में प्रतिदिन नियमित रूप से सामायिक जाप वारने की प्रेरणा पारिवारिक संस्कारों से मिली जो आध्यात्मिक विकास में मूलतः योगभूत बनी। विवाह के उपरांत धर्मपत्नी शशिकताजी का मिलने पर यह एक और एक एकादश की तरह दिनानुदिन बढ़ता चला गया और फिर मूतचन्दनी नाहर तेरापंथ धर्मसंध और संमपति के प्रति सर्वात्मना समर्पित हो गये। सन् 1991 में योग साचिका शासन गौरव साध्यीयी राजीमतीजी एवं सन् 1994 मुनिश्री राजकरणजी की पावन सन्निधि में उनकी प्रेरणा से धार्मिक और सामाजिक प्रवृत्तियों से जुड़ाव का पथ प्रशस्त हुआ। संगठन के कार्यों के सुचारु क्रियान्वयन के क्रम में आचार्य श्री महाप्रज्ञजी से अनेक बार पत्राचार हुआ। मूलचन्दजी ने संघ के कार्यों के सुचारु संचालन के दृष्टिगत 36 पृष्ठों का एक ी फैक्स आचार्य श्री को भेजा जो आपके चौद्धिक कुशलता को दर्शाता है।
गुरु दृष्टि ही जीवन सृष्टि – मूलचन्दजी नाहर ने अपनी समर्पण भावना, भक्ति भावना, सेवा भावना से गुरु के दिल में विश्वस्त स्वान बनाया है। आपने उच्च पदों पर आसीन होकर सामाजिक क्षेत्र में अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त की है। देव, गुरु, धर्म के प्रति आपकी अटूट आस्था और श्रद्धा है। तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टम आचार्य गणाधिपति आचार्य श्री तुलसीजी, गायन दार्शनिक आचार्य श्री महाप्रज्ञजी, सुषा मनीषी आचार्य श्री महाश्रमणजी का आशीर्वाद सदैव मूलचन्दजी नाहर को प्राप्त होता रहा। आचार्य यी गागप्राजी का विश्वस्त चायक बनकर ‘शासनसेवी’ संबोधन और ‘युवा गौरव’ अलंकरण प्राप्त किया।
शुभ संयोगों की प्राप्ति – सत्कर्म निष्ठा, धर्म निष्ठा, संघ निष्ठा, गुरु निष्ठा और चरित्र निष्ठा ये पाँच प्रकार की निष्ठाएं नूलचन्दजी नाहर के जीवन में देखी जा सकती है। कर्नाटक के बड़े-बड़े धार्मिक स्थलों से आपका व्यापक संपर्क है। दक्षिण भारत में संघीय गतिविधियों को विस्तारित करने का श्रेय आपको है। अगरचंदजी नाहर, बख्तावरमलजी नाहर, धनराजजी नाहर तथा परिजनों ने बेंगलूरु के गांधीनगर में निर्मित सभा भवन के उद्घाटनकर्ता के रूप में प्रमुख भूमिका निभायी। मूलचन्दजी नाहर की सेवा भावना का उल्लेख करते हुए दिगम्बर जैन समाज के प्रसिद्ध तीर्थ ग्रवणबेलगोला के मट्टारक चारुकीर्तिजी ने ‘समाजरत्न’ के अलंकरण से आपको सन्नानित और विभूषित किया। मूलचन्दनी नाहर पिछले कई वर्षों से आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में रहकर दीर्घखलीन उपासना का लाभ ले रहे हैं। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मूलचन्दजी ने अपने सौम्य, मृदु व्यवहार तथा विनम्रता से अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। समाज का विकास चाहने वालों के सम्मान के पात्र मूलचन्दजी नाहर सत्चनुच में ‘नाहर’ हैं।
‘मनुहार’ की शुरुआत – मूलचन्दजी ने संकल्प लिया कि महीने में पाँच दिन स्वयं गुरुवेय और अन्य चारित्रात्माओं की रास्ते की सेवा में समर्पित रहेंगे। मूलचन्दजी अपने खर्च पर सैकड़ों श्रायकों को गुरुदेव के दर्शनार्थ से जाते और यहां उनके आयास व मोजन से लेकर अन्य सभी व्यवत्त्वाएं करते। यह क्रम करीब दो वर्ष तक चला। इस बीच शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने कहा कि आप इतने आयकों को गुरुदेय की सेवा में लाते हैं तो चौके की सेवा ही शुरू क्यों नहीं कर देते? साध्वीप्रमुख्या जी की प्रेरणा के परिणामस्वरूप चारित्रात्माओं की रास्ते की सेवा प्रारंभ हुई
जीवन विज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित – मूलचन्तजी नाहर तेरापंथ के विभिन्न उपक्रमों के साथ-साथ अणुव्रत तथा जीवन विज्ञान के जनहित कार्यों में तन-मन-धन से जुड़ते चले गए। आपने कर्नाटक राज्य के सरकारी विद्यालयों में जीवन विज्ञान को पाठ्यक्रम के रूप में जुड़वाने, हजारों शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करवाने, जीवन विज्ञान की पुस्तकों का कन्नड़ भाषा में अनुवाद तथा मुद्रित करवाकर निःशुल्क वितरित कराने जैस महनीय कार्य किया। जैन विश्व भारती लाडनूं में जीवन विज्ञान भवन का निर्माण करवाने में श्री देवराज मूलचन्द नाहर चेरिटेबल ट्रस्ट का विशेष योगदान रहा। सैकड़ों निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन, दवाई वितरण, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान, विद्यार्थियों को पुस्तकों, गणवेश का वितरण, जरूरतमंद विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति एवं अनेक समाजसेवा कार्यों से भामाशाह के रूप में निरंतर विकासोन्मुख रहे है। अनेक प्राकृतिक आपदाओं में श्री बालगंगाबरनाथ महास्वामीजी के साथ जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री, कपड़े, कम्ताल एवं अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण कार्य व्यापक स्तर पर किया। कोरोगा महामारी के संकट काल में भी अनेक स्थानों पर खाय सामग्री, दवा वितरण का कार्य किया।
पैतृक ग्राम जाणुन्दा का भी ध्यान – मूलचन्दजी नाहर ने अपनी अर्जित आय में से आचार्य भिक्षु समाधि स्थल सिरियारी, जैन विश्व भारती जाडनूं, तेरापंथ विश्व भारती दिल्ली, संस्था शिरोमणि जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल, अखिल भारतीय तेरापंथ मुवक परिषद्, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम, अणुव्रत विश्य भारती आदि में अर्थ विसर्जन कर महनीय कार्य किया है। इन कार्यों में आपके भ्राता देवराजजी नाहर परिवार की बराबर की सहभागिता रही है। टीपीएफ द्वारा आचार्य महाप्रज्ञ कॉलेज को निर्माण में भी आपने सहयोग प्रदान किया। जैन विश्व भारती लाडनूं में जीवन विज्ञान भवन का निर्माण करवाने में श्री देवराज मूलचन्द नाहर बेरिटेबल ट्रस्ट का विशेष योगदान रहा। पैतृक गांव में श्री सीरेमल देवराज नाहर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भवन का निर्माण श्री देवराज मूलचंदजी नाहर चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा करवाया। राजनैतिक संबंधों से मुख्यमंत्री से निवेदन कर जाणुन्दा के पास नगी पर आचार्य मावश्रगण रोतु का निर्माण करवाना आपकी कार्यक्षमता को दर्शाता है।
समाज के जाज्वल्यमान नक्षत्र – आप सिर्फ तेरापंथ धर्मसंघ के नहीं, अपितु सम्पूर्ण समाज के जाज्वल्यमान नक्षत्र है। वे कार्यकर्ता के कंधे पर हाथ रख उठते-बैठते हैं, बर्षा करते है और कार्य को गति देते हैं
सम्मान अलकरण – शासन सेवी राम्बोधन – आचार्यश्री महाशजी युवा नौख अ.भा. वेरापंथ युवक परिषद् राज्योत्सव पुरस्कार – कर्नाटक सरकार समाज राग सम्मान श्री पाठकीर्ति महाराजी श्रवणबेलगोला मामाशाह सम्मान राजस्थान सरकार आर्यभट्ट अवार्ड – 2006 डॉ. राजकुमार सद्भावना अवार्ड राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता सम्मान संथ सेवा पुरस्कार- जैन विश्व भारती जीतत्र विज्ञान पुरस्कार – अणुव्रत विश्व भारती
दायित्व निर्वहन :
अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष : आचार्य भिक्षु समाधि स्थल, सिरियारी
संयोजक : अखिल भारतीय जीवन विज्ञान अकादमी
अध्यक्ष : कर्नाटक जीवन विज्ञान अकादमी
अध्यक्ष : भिक्षु भारती (भिक्षु धाम) बेंगलूरु
अध्यक्ष : आचार्य श्री महाश्रमण चार्तुमास प्रवास व्यवस्था समिति, बेंगलूरु
निदेशक : अहिंसा समवाय मंच (F.U.R.E.C.)
मुख्य न्यासी : सेवाभावी रसायनशाला,
जैन विश्व भारती, लाडनूं
परामर्शक : जैन विश्व भारती, लाडनूं
परामर्शक : संस्था शिरोमणि जैन श्वे. तेरापंथी महासभा
परामर्शक : अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद्
परामर्शक : जीवन विज्ञान विभाग, अणुव्रत विश्व भारती
ट्रस्टी: भगवान महावीर जैन हॉस्पिटल, बेंगलूरु
ट्रस्टी : आदर्श विद्या संघ, बेंगलूरु
अध्यक्ष : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, बेंगलूरु
ट्रस्टी : जैन विश्व भारती, लाडनूं
ट्रस्टी : श्री भगवान महावीर जैन नेत्रालय, बेंगलूरु
ट्रस्टी : जैन मिशन ट्रस्ट, बेंगलूरु
संस्थापक : महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल, बेंगलूरु
ट्रस्टी : जय तुलसी फाउडेशन
एफ.सी.पी. सदस्य : जीतो, बेंगलूरु



