महेन्द्रजी लूणिया

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धार्मिकता और उदार हृदय के संगम सम्पतराजजी लूणिया के पुत्ररत्न उच्च विचारों और व्यवहार कुशलता से निरंतर प्रगति पथ पर महेन्द्रजी लूणिया

विनय और विवेक से संपन्न व्यवहार व्यक्ति की सबसे बड़ी सम्पत्ति होती है।
जिसके जीवन में विनय, विवेक और धर्म आचरण है वह जीवन में सदैव प्रगति के पथ पर बढ़ता चला जाता है।

वीर भूमि राजस्थान की सुहावनी नगरी बिलावास के मूल निवासी स्व. सुंदरबाई – स्व. बस्तीमलजी लूणिया के सुपोत्र एवं स्व. सम्पतराजजी – स्व. रतनदेवी लूणिया के तृतीय सुपुत्र महेन्द्रकुमारजी लूणिया अपने भाईयों ओर तीन बहनों में सबसे छोटे हैं। करीब 80 वर्ष पूर्व 1940 के दशक में आपके पिताजी सम्पतराजजी लूणिया बेंगलूरु महानगर में आए। आपने फेरस एवं नॉन फेरस मेटल का व्यापार प्रारंभ किया और अपने प्रतिष्ठान अशोक मेटल इंडस्ट्रीज को सफलता की ऊँचाईयों पर पहुँचाया।

आपके तृतीय सुपुत्र महेन्द्रजी लूणिया प्रारंभ में मेटल के पैतृक व्यवसाय से जुड़े लेकिन आपकी रुचि ज्वेलरी व्यवसाय में थी। इसलिए आपने 1992 में जैन टेम्पल रोड, केन्टोनमेंट में बी.एस. ज्वेलर्स के नाम से अपना प्रतिष्ठान प्रारंभ किया।
कुछ ही समय में अपनी कड़ी मेहनत, व्यवहार कुशलता और मधुर भाषिता से आपने ग्राहकों के हृदय में विशेष स्थान बना लिया। वर्तमान में बी.एस. ज्वेलर्स केन्टोनमेंट क्षेत्र में सुविख्यात ज्वेलरी प्रतिष्ठान है।
आपके अग्रज भ्राता भाभी दिनेशकुमारजी – सरलादेवी, अशोककुमारजी – वसंतादेवी, बहन – बहनोई पुष्पाबाई – मनोहरलालजी बांठिया, संतोषबाई – गौतमचंदजी कटारिया, सुशीलाबाई – डॉ कुशलराजजी सिंघवी
U.S.A. आपके ऊपर असीम स्नेह है। आपका विवाह राजस्थान में कूकड़ा मूल के कर्नाटक में के.जी.एफ. निवासी पिस्ताबाई – स्व. पारसमलजी बांठिया की गुणवान सुपुत्री सुमित्रादेवी के साथ संपन्न हुआ।

सुमित्रादेवी लूणिया बहुत ही धर्मनिष्ठ, कॉक्स टॉउन मंदिर के मण्डल में कोई भी धार्मिक कार्य में हमेशा आगे रहती है। और कोई भी कुछ सहायता पूछे तो तुरंत कर देती हैं। ये समाज सेविका हैं जो 8 साल से समाज सेवा ‘अभिव्यक्ति’ ग्रुप ट्रस्ट नामक संस्था से जुड़ी हैं। इस संस्था में उनके साथ 4 और लोग जुड़े हैं। इस संस्था से जरूरतमंदो को व्हीलचेयर, एयर बेड, ऑक्सीजन मशीन, वॉकर, बेड आदि देते हैं। कोविड के समय इस संस्था ने अनेक लोगों को सहायता की।

महेन्द्रकुमारजी लूणिया ने अपनी लगन से व्यापार के क्षेत्र में ऊँचाईयों को प्राप्त किया, विनम्रता व उदारता से समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

आपके प्रथम सुपुत्र महेशकुमारजी का शुभ विवाह नगरथपेट स्थित पारस ज्वेल्स वाले नथमलजी – लीलाबाई पगारिया हनुमंतनगर की सुपुत्री रुपादेवी एवं द्वितीय सुपुत्र जयेशकुमारजी का शुभ विवाह के.जी.एफ. निवासी सुनीलकुमारजी – मंजुलाबाई बोहरा की सुपुत्री श्वेतादेवी के साथ संपन्न हुआ है।
आपकी 21 वर्षीय सुपुत्री वंशिता लूणिया CA की पढ़ाई कर रही हैं। आपके पौत्र-पौत्री रीति, नमित एवं लेहक भी अध्ययन रत हैं।

महेन्द्रजी लूणिया का जीवन सरलता, विनम्रता, उदारता एवं धार्मिकता का संगम है।
गुरु भक्ति में अग्रणी जैन एकता के प्रबल क्षधर महेन्द्रजी संप्रदायवाद से कोसों दूर हैं।

आपके प्रथम सुपुत्र महेशजी लूणिया का ओ.टी.सी. रोड में लूसिया सिटी सेंटर में नई टेक्नॉलॉजी में अग्रणी बी. एस. इंफोटेक के नाम से कमयूटर, लैपटॉप, प्रिंटर आदि का शोरुम है एवं आपकी सेवाएँ सराहनीय है।
आपके द्वितीय सुपुत्र जयेशजी आपके साथ बी.एस. ज्वेलर्स में व्यवसाय संभालते हैं।

महेन्द्रजी लूणिया सदैव हँसते मुस्कुराते हैं और हर व्यक्ति के मुख पर मुस्कान लाते हैं।
उनका मधुर व्यवहार हर व्यक्ति याद रखता है। उन्होंने अपने बच्चों को सदैव विश्वसनीयता,
अनुशासन तथा नियम के साथ हर कार्य को निष्ठा एवं प्रसन्नतापूर्वक करना सिखाया है।

महेन्द्रजी लूणिया का जीवन सरलता, विनम्रता, उदारता एवं धार्मिकता का संगम है।
गुरु भक्ति में अग्रणी जैन एकता के प्रबल पक्षधर महेन्द्रजी संप्रदायवाद से कोसों दूर हैं।

महेन्द्रजी लूणिया के नानोसा केवलचंदजी खटोड़ (जैतारण) साहुकारपेट, चेन्नई अत्यंत धर्मनिष्ठ थे। वे सिर्फ चेन्नई ही नहीं अपितु पूरे भारत में अनेक स्थानों पर आयम्बिल खाता, आयम्बिल भवन में सहयोग में अग्रणी थे।

पद प्रतिष्ठा
ट्रस्टी: भगवान महावीर जैन हॉस्पिटल
सम्पतराजजी लूणिया आज से 25 वर्ष पूर्व
ट्रस्टी बने एवं ICCU ब्लॉक के लाभार्थी
बनकर विशाल सहयोग राशि प्रदान की।

संस्थाओं में ट्रस्टी :

  • भगवान महावीर जैन कॉलेज (JGI)
  • श्री मुनिसुव्रतरवामी जैन मंदिर, कॉक्सटाउन
  • श्री मुनिसुव्रतरवामी जैन मंदिर, केन्टोनमेंट
  • श्री अजितनाथ जैन श्वे. मू.पू. संघ, टेनरी रोड
  • श्री शान्तिनाथ जैन श्वे.मू.पू. संघ, बिलावास
  • संभवनाथ जैन भवन, वी.वी. पुरम, बेंगलूरु
  • बी.बी.यू.एल. जैन विद्यालय, बेंगलूरु
  • आदर्श विद्या संघ, बेंगलूरु
  • शांति धाम (वृद्धाश्रम) कनकपुरा रोड, बेंगलूरु
  • श्री मरुधर केसरी जैन गौशाला, के.जी.एफ.

जैन समय ‘अनमोल रत्न’ महेन्द्रजी लूणिया सौम्य व्यक्तित्व के धनी, युवा जगत की शान, उदारमना, मिलनसार
जैन समय के ‘अनमोल रत्न’ महेन्द्रजी लूणिया की रग-रग में जैन धर्म की प्रभावना की भावना है।
इसी भावना से आप हमारे विश्व व्यापी धर्मप्रचार अभियान को गति देने हेतु जैन समय के स्तंभ सहयोगी बने हैं।

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