जैन समय। बेंगलूरु
चेन्नई। हिंसा करने वाला पापी कहलाता है, परंतु किसी के साथ किए गए विश्वास को तोड़कर विश्वासघात करना महा पापी के रूप में माना जाता है। यह विचार राष्ट्रसंत कमलमुनिजी कमलेश ने व्यक्त करते हुए कहा कि जो व्यक्ति विश्वास बनाए रखने के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार होता है, वह सच्चा धार्मिक बनता है। खोया हुआ धन वापस प्राप्त किया जा सकता है परंतु खोया हुआ विश्वास पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। विश्वास बड़ी संपत्ति है, जो कभी समाप्त नहीं होती। विश्वास तोड़ने वाला धार्मिक कहलाने वाला भी दुर्गति में जाता है। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ हनुमंतनगर बेंगलूरु के मार्गदर्शक कल्याणसिंहजी बुरड़, अध्यक्ष गौतमचंदजी सिंघवी, उपाध्यक्ष हुक्मीचंदजी बाफना, मंत्री सुरेशचंदजी धोका, नेमीचंदजी दक, मांगीलालजी बोहरा, सुनीलजी बोहरा महावीरजी बुबकिया 2026 के चातुर्मास की विनती लेकर उपस्थित हुए।
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