Headlines

समाज के जाज्वल्यमान नक्षत्र, मधुर स्वभाव के धनी श्री देवीचंदजी बोहरा

Devichandji Bohra

धर्म की राह पर चलकर जीवन को संवार लिया, सेवा और प्रेम से हर दिल में स्थान बना लिया। मिलनसारिता, विनम्रता जिनकी पहचान बनी, देवीचंदजी बोहरा ने यश कीर्ति अंकित कर लिया।

समाज के जाज्वल्यमान नक्षत्र, संस्कारों से समृद्ध, सेवा से प्रतिष्ठित, मधुर स्वभाव के धनी तन, मन, धन के साथ जिनशासन सेवा में समर्पित अनमोल रत्न देवीचंदजी बोहरा

धर्म, संस्कार और सेवा इन तीनों के त्रिवेणी संगम से निर्मित व्यक्तित्व के धनी देवीचंदजी देवड़ा बोहरा का जीवन प्रेरणादायी है। राजस्थान की पुण्य धरा, सोजत रोड के मोहराकलां ग्राम में सुश्रावक दादाजी बिरदीचंदजी बोहरा, पिताश्री प्रेमराजजी बिदामबाई देवड़ा बोहरा के घर आंगन में जन्मे देवीचंदजी बोहरा ने आपने बाल्यकाल से ही धर्म, संस्कार एवं सदाचार के अमूल्य गुणों को आत्मसात किया है।
देवीचंदजी देवड़ा बोहरा ने प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान में ही पूर्ण की, जहाँ वे मेधावी एवं अध्ययनशील विद्यार्थी के रूप में जाने जाते थे। शिक्षा के प्रति उनकी लगन, अनुशासन और जिज्ञासु प्रवृत्ति ने उन्हें ज्ञान के साथ-साथ जीवन मूल्यों में भी समृद्ध बनाया। सरलता, विनम्रता और मधुर व्यवहार आपके व्यक्तित्व की विशेष पहचान है।
देवीचंदजी देवड़ा बोहरा का शुभ विवाह सांडिया, पाली के मूल निवासी, भीष्म प्रतिज्ञाधारी आचार्य सम्राट श्री जयमलजी म. सा. के प्रति प्रगाढ़ श्रद्धावान सुश्रावक ऊँकारमलजी सालेचा बोहरा की गुणवान सुपुत्री मैनादेवी के साथ हुआ। मैनादेवी भी धर्मपरायण, कुशल गृहिणी एवं सहयोगी प्रवृत्ति की धनी हैं।
देव, गुरु, धर्म के प्रति श्रद्धा एवं साधु-साध्वी भगवंतों के प्रति आपकी सेवा भावना अनुमोदानीय है। देवीचंदजी बोहरा का जीवन जिनशासन के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

संस्कारों, समर्पण और प्रेम से सजी विरासत
सामायिक, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय एवं प्रवचन श्रवण में आपकी विशेष रुचि है। बोहरा परिवार संस्कार, एकता, प्रेम और परस्पर समर्पण का सजीव उदाहरण है। आपके बड़े भ्राता भाभी स्व. लूणचंदजी स्व. उगमादेवी बोहरा तथा आपकी बड़ी बहन लादुबाई – स्व. भंवरलालजी पीपाड़ा, बेंगलूरु (मुसालिया) का परिवार भी धर्मनिष्ठ है। प्रथम सुपुत्र शांतिलालजी बोहरा का शुभविवाह कुशालपुरा मूल के चेन्नई निवासी जवरीलालजी की गुणवान सुपुत्री शोभादेवी के साथ हुआ। द्वितीय सुपुत्र अशोककुमारजी बोहरा का शुभ विवाह बली कूकड़ा मूल के आर.टी. नगर, बेंगलूरु निवासी उत्तमचंदजी-चन्द्रादेवी गादिया की गुणवान सुपुत्री रेखादेवी के साथ संपन्न हुआ। तृतीय सुपुत्र महेंद्रकुमारजी बोहरा का शुभ विवाह बिलावास (राज.) निवासी पारसमलजी सरस्वतीबाई लूणिया (चामराजपेट) की गुणवान सुपुत्री चंद्राबाई (उषाबाई) के साथ हुआ। चतुर्थ सुपुत्र विनोदजी बोहरा का शुभविवाह चंडावल मूल के चमराजपेट निवासी जवरीलालजी-यशोदादेवी गादिया की गुणवान सुपुत्री सुनितादेवी के साथ हुआ है। आपकी सुपुत्री संतोषबाई का शुभ विवाह रास बाबरा (निम्बाहेड़ा) मूल के जीवनहल्ली, बेंगलूरु निवासी चम्पालालजी मदनबाई लोढ़ा के प्रतिभावान सुपुत्र सुरेशचंदजी लोढ़ा के साथ हुआ। शांतिलालजी के दो सुपुत्र विमलजी एवं राहुलजी हैं। राहुलजी का विवाह कुड़ाया मूल के वाण्यमबाड़ी निवासी उत्तमचंदजी-प्रभादेवी कोठारी की सुपुत्री रुशिकाजी के साथ हुआ। शांतिलालजी की सुपुत्री मनीषाजी का विवाह ऊटी निवासी उमेशचंदजी-सरोजाबाई नाहर के सुपुत्र विक्रमजी के साथ हुआ। मनीषाजी विक्रमजी के 2 पुत्र युग एवं सिद्धार्थ नाहर हैं। अशोककुमारजी के सुपुत्र अक्षयजी का विवाह ब्यावर मूल के होसकोटे निवासी पवनजी-प्रेमबाई कोठारी की सुपुत्री लताजी के साथ हुआ एवं प्रतीकजी का विवाह सोजत सिटी मूल के वसंतनगर, बेंगलूरु निवासी धनपतराजजी सुराणा की सुपौत्री एवं अनिलजी-हेमाबाई सुराणा की सुपुत्री दीक्षाजी के साथ हुआ है। महेंद्रकुमारजी के प्रथम सुपुत्र जतिनजी का विवाह मैसूर निवासी किशोरचंदजी- किरणबाई कोचर की सुपुत्री मेघाजी के साथ हुआ। द्वितीय सुपुत्र जयेशजी एवं तृतीय सुपुत्र नीवजी हैं। महेंद्रकुमारजी की सुपुत्री ईशिकाजी का शुभविवाह अभी 26 अप्रैल 2026 को मसूदा मूल के त्यागराजनगर, बेंगलूरु निवासी प्रेमचंदजी-अनिताबाई गांग के सुपुत्र दिव्यमजी के साथ हो रहा है। विनोदजी की प्रथम सुपुत्री श्वेताजी का विवाह सोजत रोड मूल के चामराजपेट, बेंगलूरु निवासी जितेन्द्रजी-ललिताजी समदड़िया के पुत्र यशजी के साथ हुआ। श्वेताजी-यशजी समदड़िया के पुत्र दिवित हैं। एवं द्वितीय सुपुत्री शीतलजी का विवाह येलगुंडपाल्या, बेंगलूरु निवासी महावीरचंदजी-संतोषबाई ओस्तवाल (केलवाज) के पुत्र आदेशजी के साथ हुआ है। विनोदजी के सुपुत्र गौरवजी BBA Final की पढ़ाई कर रहे हैं। दौहित्र दौहित्रवधु मनीषजी खुशबूजी लोढ़ा, दौहित्री-जंवाई नेहाजी अभिषेकजी बाफना, एवं कोमलजी शुभमजी बिलवाड़िया हैं। देवीचंदजी के प्रपौत्री रिशा एवं प्रपौत्र प्रियांश, रिदान, ईशांक हैं। संपूर्ण परिवार मिलनसार, सुसंस्कारित एवं धर्म के प्रति श्रद्धावान है।

सबके प्रिय हैं मधुर व्यवहार और प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी देवीचंदजी बोहरा
आपका सौम्य स्वभाव, प्रसन्न मुख मंडल, मधुर वाणी, मिलनसारिता एवं सभी के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करने की क्षमता आपको विशेष बनाती है। आप रिश्तों को निभाने में कुशल हैं और परिवार एवं समाज के बीच सेतु का कार्य करते हैं। आपने कड़ी मेहनत, ईमानदारी एवं दृढ़ निष्ठा के बल पर अपने व्यापार को निरंतर प्रगति के शिखर तक पहुँचाया है। आपकी कार्यशैली और ग्राहकों के साथ मधुर व्यवहार ने व्यापार में उन्नति के साथ ही विश्वास स्थापित किया है। आपके जीवन का मंत्र रहा है ‘प्रामाणिकता ही व्यापार का आधार है और सेवा ही जीवन का उद्देश्य ।’ आपकी कार्यशैली, आपकी दूरदृष्टि और आपका समर्पण भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है। आपके इन्हीं सुसंस्कारों एवं मार्गदर्शन को अपनाकर आपके चारों सुपुत्र, पौत्र, प्रपौत्र सबके साथ मिलनसारिता एवं मधुर व्यवहार से सबके हृदय में प्रिय स्थान बना रहे हैं और अपने प्रतिष्ठान अर्जुना वरा ज्वेलर्स जयनगर, रिषभ ज्वेलर्स विल्सनगार्डन, प्रेम ज्वेलर्स विल्सनगार्डन में ज्वेलरी व्यवसाय को बेंगलूरु नगर में विशेष प्रतिष्ठित निरंतर उच्चतर शिखर पर प्रगतिमान कर रहे हैं।

धार्मिक, सामाजिक और सेवाकार्यों में विराट योगदान
अनमोल रत्न देवीचंदजी बोहरा तन मन धन से समाज हित के कार्यों में अग्रणी रहे हैं।
देवीचंदजी बोहरा की देखरेख में विल्सनगार्डन स्थानक भवन का निर्माण हुआ और आपके पिताश्री प्रेमराजजी बोहरा के करकमलों से जैन स्थानक का उद्घाटन हुआ।
आपका विभिन्न संघ संस्थाओं एवं शुभ कार्यों में विपुल योगदान है।
अध्यक्ष एवं ट्रस्टी : श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन ट्रस्ट, विल्सनगार्डन, बेंगलूरु
संरक्षक : श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, विल्सनगार्डन, बेंगलूरु
पूर्व अध्यक्ष : श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, सोजत रोड (राज.)
संघ यात्रा सहयोगी : 2016 में पालीताणा, सम्मेदशिखरजी आदि तीर्थ स्थल
देवीचंदजी बोहरा के सुपुत्र शांतिलालजी बोहरा जैन युवा संगठन के सदस्य हैं।
देवीचंदजी बोहरा के सुपुत्र अशोकजी बोहरा विल्सनगार्डन संघ के सदस्य हैं।
देवीचंदजी बोहरा के सुपुत्र महेन्द्रजी बोहरा विल्सनगार्डन संघ के सहमंत्री हैं, विल्सनगार्डन जैन युवा संगठन के पूर्व अध्यक्ष तथा JITO के आजीवन सदस्य हैं।
देवीचंदजी बोहरा के सुपुत्र विनोदजी बोहरा विल्सनगार्डन जैन युवा संगठन के पूर्व अध्यक्ष एवं विल्सनगार्डन संघ के सदस्य हैं तथा JITO के आजीवन सदस्य हैं

जैन समय ‘अनमोल रत्न’ देवीचंदजी देवड़ा बोहरा
अतिथि सत्कार में अग्रणी देवीचंदजी बोहरा परिवार को मित्रों के साथ बैठने, भोजन करने और वार्तालाप करने में असीम आनन्द की अनुभूति होती है। आप दृढ़ निश्चय एवं दूरदर्शी विचारों के धनी हैं। आप में पदलिप्सा लेशमात्र भी नहीं है जिससे सबके हृदय में आपने विशेष स्थान निर्मित किया है। जैन समय के ‘अनमोल रत्न’ देवीचंदजी बोहरा की रग – रग में जैन धर्म की प्रभावना की प्रबलतम भावना है। जैन समय के विश्व व्यापी धर्मप्रचार अभियान को गति देने हेतु आपने जैन समय के स्तंभ सहयोगी बनकर हमारे उत्साह को अनेक गुणा बढ़ाया है। हम बोहरा परिवार के लिये सर्वसुखमय जीवन की यशस्वी मंगलकामनायें करते हुए शत शत आभार प्रदर्शित करते हैं।