जैन समय। बेंगलूरु
श्री धर्मनाथ जिनालय, जयनगर का प्रांगण एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा, जब तार्किक शिरोमणि, आचार्य अभयशेखरसूरीश्वरजी की निश्रा में साध्वीवृंद पावननिधिश्रीजी एवं यशोनिधिश्री जी आदि ठाणा का चातुर्मास प्रवेश अत्यंत भक्तिभाव, विधिपूर्वक हुआ। आचार्य अभयशेखरसूरीश्वरजी ने चातुर्मास की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चातुर्मास मात्र एक कालखंड नहीं, अपितु आत्मा के पुनरुद्धार का श्रेष्ठ साधन है। यह आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आत्मोन्नयन की चारमासिक तीर्थयात्रा है, जो हमारे जीवन में संयम-संस्कार और सत्संग के बीज बोती है। उन्होंने जीवन में धर्म को आत्मसात करने के गूढ़ सूत्र प्रदान किए और उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को चार मास तक अधिकाधिक आराधना, उपासना व स्वाध्याय करने का भाव जागृत किया।
समारोह में श्री राजस्थान जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ, जयनगर के अध्यक्ष चन्द्रकुमारजी संघवी, उपाध्यक्ष प्रवीणजी गांधी, सचिव हीरालालजी कोठारी, सहसचिव नितिनजी सोनेगरा आदि पदाधिकारी, ट्रस्टीगण के साथ ही चिकपेट संघ के अध्यक्ष गौतमजी सोलंकी, नगरथपेट संघ के सचिव किशोरजी जियानी एवं विभिन्न संघों के प्रतिनिधि तथा अन्य नगरों से पधारे श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। चातुर्मास के अंतर्गत विविध धार्मिक आयोजन, तप-आराधनाएं, प्रवचन श्रंखलाएं एवं परमार्थिक सेवाएँ आयोजित की जाएगी, जो साधकों को आत्मा की ओर प्रेरित करेंगी।
आपके क्षेत्र में कोई भी जैन धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम जैसे दीक्षा, मंदिर प्रतिष्ठा, प्रवचन, संघ यात्रा, जीवदया, समाज सेवा, रक्तदान शिविर, अन्नदानम या अन्य कोई आयोजन हो रहा हो, तो कृपया उसकी जानकारी, फोटो एवं वीडियो हमें भेजें। हम ‘जैन समय’ पोर्टल पर इसे निःशुल्क प्रसारित करेंगे।
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Tag : Acharya Abhayshekharsuriji Maharajsa. Jain Murtipujak Sampraday. Jayanagar Chaturmas 2025


