देव, गुरु, धर्म के प्रति समर्पित थे शांतिलालजी सालेच्छा
जैन समय। बेंगलूरु – मरुधरा की सुप्रतिष्ठित धर्मनगरी मजल के मूल निवासी, बेंगलूरु महानगर के सुप्रसिद्ध ‘राजधानी’ नोट बुक निर्माता राजधानी पेपर कंपनी के स्वामी, अखिल कर्नाटक
प्राणी दया संघ के अध्यक्ष, विद्वत श्रावकरत्न शांतिलालजी सालेच्छा का 2 जून 2025 को स्वर्गवास हो गया। आप स्वनाम धन्य श्रेष्ठीवर्य सुश्रावक स्व. भीकमचंदजी – सुश्राविका स्व. कमलादेवी सालेच्छा के द्वितीय सुपुत्र थे। आपका विवाह बाबुलालजी डूंगरचंदजी छाजेड़, चेन्नई (करमावास, राज.) की छोटी बहन सुखीदेवी के साथ संपन्न हुआ। आपके मुख पर सदैव सौम्य मुस्कान छायी रहती थी।
आपकी सामायिक प्रतिक्रमण आराधना में गहरी रुचि थी। आप कनार्टक जैन स्वाध्याय संघ के ट्रस्टी होने के साथ ही वरिष्ठ स्वाध्यायी थे। आपकी ज्ञान, ध्यान और स्वाध्याय में गहन रुचि थी और आप लगभग 20 वर्षों से पर्युषण पर्वाराधना हेतु स्वाध्यायी सेवाएँ प्रदान कर रहे थे। श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, जयनगर के भी ट्रस्टी थे। आपके हृदय में सगे संबंधियों के प्रति विशेष प्रेम, मान मनुहार एवं साधर्मिक बंधुओं के प्रति वात्सल्य, उन्हें उन्नति के पथ पर बढ़ाने और सहयोग की अप्रतिम भावना थी। आप सहनशीलता, समता, ममता और वात्सल्य की साक्षात मूर्ति थे। दृढ़ संकल्प एवं उच्च मनोबल की धनी थे। हर कार्य को सर्वोत्तम तरीके से संपन्न करना आप की विशेषता थी। धर्म आराधना की प्रेरणा देने में अग्रणी थे।
आपके बड़े भ्राता सुश्रावक पारसमलजी सालेच्छा जो कि श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ अक्कीपेट एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चामराजपेट, श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ अक्कीपेट, श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ शंकरपुरम, श्री गुरु ज्येष्ठ पुष्कर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट, कर्नाटक जैन स्वाध्याय संघ आदि के ट्रस्टी हैं, वे भी आपको अपना स्वाध्याय गुरु मानते हैं जो आपकी ज्ञान, ध्यान, स्वाध्याय के प्रति समर्पण को दर्शाता है। आपके अनुज सुरेन्द्रकुमारजी सालेच्छा भी आपके भ्रातृ प्रेम एवं मधुर व्यवहार के गुणगान करते हैं।
आपकी धर्म पत्नी सुखीदेवी, पुत्र-पुत्रवधु सुशीलजी-रेणुकाजी, पौत्र- पौत्री रीत, कृत, स्वरा, पुत्री-जंवाई श्वेताजी-जितेन्द्रजी गादिया एवं शिल्पाजी-हँसमुखजी गुलेच्छा, दौहित्र युवान, दौहित्री सांची आपके आदर्शों का अनुसरण कर रहे हैं। शांतिलालजी सालेच्छा के निधन से समाज में एक बड़े स्वाध्यायी रत्न सुश्रावक की कमी हुई है। ‘जैन समय’ समूह की ओर से धर्म परायण शांतिलालजी सालेच्छा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।




