जैन समय। बेंगलूरु – श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बेंगलूरु में विराजित पंडित रत्न ज्ञानमुनिजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में बच्चों को भगवान का रूप माना गया है। बालक में सरलता और सहजता प्रकट होती है। हमारे जीवन में भी सरलता और सहजता होनी चाहिए। सहजता और सरलता में ही जीवन का आनंद छिपा है। बालक की सहजता एवं सरलता को अध्यात्म ने श्रेष्ठ माना है।
सरलता में वह ताकत है जो हमें सच्चे अर्थों में मानव बनाती है और परमात्मा के निकट ले जाती है। जिसके मन में सरलता है वही भगवान होते है और जिसके मन में पाप है, मलिनता है वहाँ भगवान का वास नहीं होता। जिसका मन निर्मल है, वह चाहे अज्ञानी हो, साधारण हो फिर भी वह भगवान के समीप होता है। लेकिन जिसके मन में पाप है, कषाय है, वह चाहे तीर्थों पर जाए, मंत्र जपे भगवान उससे दूर रहते हैं। इसलिए बालक की तरह सरल बनो क्योंकि बालक में ही भगवान का स्वरूप छिपा होता है।
इसके पूर्व डॉ. वरुणमुनिजी ने कहा कि संसार में सच्चा सुख आत्म-अवलोकन से मिलता है, बाहर भटकने से नहीं। लेकिन व्यक्ति संसार में सुख को ढूंढता है। सुख और शांति तो स्वयं की आत्मा में समाये हैं। सच्चा आनंद तो भीतर में है। परमात्मा ने सुखी होने के 9 पुण्य बताए हैं। दान, शील, संयम, तप, स्वाध्याय, प्रत्याख्यान, प्रतिक्रमण, मैत्री भाव और सम्यक दर्शन। इन 9 पुण्यों का पालन करने वाला व्यक्ति न केवल इस जीवन में, बल्कि भव-भव में सुख और शांति का अनुभव करता है।
नेमीचंदजी दलाल ने बताया कि मेवाड़ संघ शिरोमणि अम्बालालजी म.सा. का 121 वाँ जन्मोत्सव, श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्यमुनिजी म. सा. का 75वाँ संयम वर्ष, नरेशमुनिजी म.सा. का 44वाँ दीक्षा दिवस, साध्वी प्रेमवती का 25वाँ पुण्य स्मृति दिवस समारोह 5 जून को मेवाड़ भवन, यशवंतपुर में तप त्याग एवं धर्म आराधना द्वारा मनाया जाएगा। ज्ञानमुनिजी का चातुर्मासिक प्रवेश 28 जून को यलहंका में और उप प्रवर्तिनी साध्वी निर्मलाजी म.सा. का राजाजीनगर स्थानक में 2 जुलाई को होगा। अध्यक्ष प्रकाशचंदजी चाणोदिया ने आभार ज्ञापित किया। संचालन संघ मंत्री नेमीचंदजी दलाल ने किया।
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