जैन समय। बेंगलूरु – श्री गुरु ज्येष्ठ पुष्कर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत श्री गुरु ज्येष्ठ पुष्कर जैन आराधना केन्द्र के उद्घाटन की बोलियों के कार्यक्रम में संबोधित करते हुए राष्ट्र संत, घोर तपस्वी, उपप्रवर्तक श्री नरेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि खाया-पिया अंग लगेगा, दान दिया संग चलेगा, बाकी बचा जंग लगेगा। कमाने के लिए दिमाग चाहिए, लेकिन दान देने के लिए दिल चाहिए। धन्य हैं वे लोग जो अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि परमार्थ के लिए जीते हैं। सासन रत्न, युवा मनीषी, मधुर वक्ता श्री शालीभद्रमुनिजी ने अपने उपदेश में कहा कि दूध का सार है मलाई और जीवन का सच्चा सार है परोपकार। यदि आप किसी का भला करेंगे तो वह आपके पास दुगुना होकर लौटेगा। धन का सदुपयोग करेंगे तो वही धन सच्चा सुख देगा, अन्यथा वह केवल एक चौकीदार बनकर रह जाएगा।

साध्वी मेघाश्रीजी ने कहा कि धन की तीन अवस्थाएं होती हैं दान, भोग और नाश। यदि आप अपने धन को परोपकार में लगाएँगे तो पुण्य का बंध होगा। भामाशाह, दानवीर होते हैं जो जीवन में सुखपूर्वक दान करते हैं। साध्वी समृद्धिश्रीजी ने कहा कि गुरु हमारे जीवन को उन्नति की ओर ले जाते हैं। साथ ही साध्वी पुनीतज्योतिजी का भी पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।
चढ़ावे के इस कार्यक्रम में अध्यक्ष नेमीचंदजी सालेचा ने सभी का स्वागत करते हुए उद्घाटन के अवसर पर कहा कि लक्ष्मी का सदुपयोग करें। महामंत्री महावीरचंदजी मेहता ने गुरुदेव की महिमा का गुणगान करते हुए बताया कि दिनांक 4, 5, 6 जुलाई 2025 को भवन के उद्घाटन कार्यक्रम होंगे और 7 जुलाई को गुरुदेव एवं गुरुणी माँ सत्यप्रभाजी, दर्शनप्रभाजी, सुप्रभाजी आदि ठाणा के चातुर्मास प्रवेश के पावन अवसर पर सभी को पधारने का निमंत्रण दिया। उद्घाटन के चढ़ावे में मीठालालजी भंसाली, पारसमलजी सालेचा (राजधानी) नेमीचंदजी सालेचा, अशोकजी रांका, उत्तमचंदजी रातड़िया, वी. जी. पारख, माणकजी बडेरा, प्रवीणजी भंडारी, महावीरजी मेहता, दिनेशजी चौपडा, ललितजी कानुंगा, दिलीपजी चौपडा, प्रवीणजी नेतानी, विनोदजी भुरट, सुरेन्द्रजी गुलेछा, उत्तमचंदजी सालेचा, कमलेशजी छाजेड़, केवलजी पालरेचा, पदमजी बडेरा, अशोकजी खांटेड़, हीराचंदजी सालेचा, गौतमजी संचेती, महावीरजी संचेती,
पुखराजजी मेहता, पदमराजजी मेहता, शांतीलालजी भंडारी, महेन्द्रजी मुणोत, रमेशचंदजी सिसोदिया, पृथ्वीराजजी मेहता, महावीरजी मेहता (चामराजपेट), राजेशजी कांठेड व अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे व बोलियों में भाग लिया। संगीतकार दीपकजी करणपुरिया ने बहुत ही हर्ष उल्लास से बोलियाँ लगवायी।
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