अहिंसात्मक रूप से बकरीद मनाकर सद्भावना की मिसाल कायम करें : दयानंदस्वामीजी

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Vishwa Prani Kalyana Mandal Bangalore

जैन समय। बेंगलूरु – विश्व प्राणी कल्याण मंडल के संस्थापक अध्यक्ष एवं कर्नाटक सरकार गौसेवा आयोग के पूर्व सदस्य दयानंदस्वामीजी ने प्रेस क्लब ऑफ बेंगलोर परिसर में जानकारी देते हुए बताया कि कर्नाटक में सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के आदेश एवं कर्नाटक गौवंश एवं पशु हत्या प्रतिबंध कानून 2020 एवं कर्नाटक पशु बलि प्रतिबंध कानून 1959 के अनुसार किसी भी प्रकार के एवं किसी भी उम्र के गोवंश की हत्या एवं बलि पर रोक लगाने के आदेश का संदर्भ देते हुए बकरीद पर किसी भी प्रकार से गौवंश की बलि एवं पशुओं की कुर्बानी नहीं हो ऐसी समुचित प्रशासनिक व्यवस्था करने हेतु सरकार से निवेदन किया। दयानंदस्वामीजी ने पशु प्राणी बलि निर्मूलन जागृति महासंघ के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने
कर्नाटक सरकार के मुख्य सचिव, गृह सचिव एवं पशुपालन विभाग के सचिव, कर्नाटक पुलिस महानिदेशक, बेंगलूरू महानगर पुलिस आयुक्त एवं राज्य के सभी जिलों के कलक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों को भी कोर्ट आदेश का संदर्भ देते हुए किसी भी प्रकार से गौवंश की हत्या एवं बलि नहीं होने देने का आग्रह किया है। इस संदर्भ में कर्नाटक सरकार गौसेवा आयोग के पूर्व सदस्य उत्तमचंदजी छाजेड़, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चामराजपेट के संचालकद्वय सुखवीरचंदजी कोठारी एवं सुरेशचंद्रजी रुणवाल, अखिल एकता उद्योग व्यापार मंडल-संपूर्ण भारत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोकजी नागोरी, सामाजिक कार्यकर्ता ओमप्रकाशजी मकाणा की सहभागिता रही। दयानंदस्वामीजी ने लोगों से विनती की है कि गोवंश एवं पशु हत्या मुक्त अहिंसात्मक रूप से बकरीद मनाकर सब प्राणियों के प्रति करुणा एवं सद्भावना की मिसाल कायम करें। उत्तमचंदजी छाजेड़ ने कहा कि सब धर्मों का संदेश दया, करुणा, शान्ति एवं जीवों के प्रति सद्भावना का है। अतः किसी भी प्राणी की धर्म के नाम पर हिंसा नहीं करें। अशोकजी नागोरी ने कहा कि हमारे देश का संविधान एवं कानून सबके हित में है और कानून का पालन सबका कर्तव्य है। हमारी संस्कृति विश्व बंधुत्व एवं प्राणी मात्र के प्रति सद्भावना की है। हर प्राणी को जीने का अधिकार है और हमें उस अधिकार को नहीं छीनना चाहिए। अहिंसात्मक रूप से धार्मिक त्यौहार मनाने से विश्व में प्रेम और शान्ति का सुखमय वातावरण निर्माण होता है तथा पर्यावरण की रक्षा के साथ प्रकृति का संतुलन भी बना रहता है। सुखवीरचंदजी कोठारी ने अहिंसा एवं प्राणी रक्षा के इस पुनीत प्रयास में सभी के सहयोग एवं समर्थन हेतु विनती की।

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