पुण्योपार्जित लक्ष्मी का सदुपयोग कर रहे हैं श्रेष्ठिवर्य सम्पतराजजी कोठारी युवा वर्ग के चमकते सितारे, अनमोल रत्न गिरीशकुमारजी कोठारी
नोजवानों इस समाज के आधार तुम हो, वयनांजन तुम हो, हृदय हार तुम हो। अपनी शक्ति को पहचानों और आगे आओ नोजवानों इस समाज की पतवार तुम हो।

राजस्थान की सुहावनी नगरी बांकली के मूल निवासी स्व. श्री पुखराजजी स्व. श्रीमती पानीबाई कोठारी के सुपौत्र एवं श्री संपतराजजी श्रीमती पुष्पाबाई कोठारी के सुपुत्र गिरीशकुमारजी कोठारी जिनशासन की सेवा में बढ़-चढ़कर सहयोग करके समाज में एक नया आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं। आज से करीब 120 वर्षों पूर्व हजारीमलजी जवानमलजी परिवार बेंगलूरु में सुप्रतिष्ठित हुआ। जवानमलजी कोठारी के सुपुत्र पुखराजजी कोठारी ने कपड़े का व्यापार प्रारंभ किया। अपनी मेहनत, बुद्धि कौशल्य और लगन से आप निरंतर प्रगति पथ पर बढ़ते रहे। श्री आदिनाथ जैन मंदिर, चिकपेट में पुस्वराजजी कोठारी ने सक्रिय योगदान दिया। पुखराजजी कोठारी के सुपुत्र सम्पतराजजी कोठारी भी युवावस्था में ही धर्म के संस्कारों से जुड़ गए। आपने व्यवसाय के क्षेत्र में कुछ विशेष करने का निश्चय किया और फाइनेंस व्यवसाय में कदम रखे और निरंतर प्रगति पथ पर बढ़ते रहे। सम्पतराजजी का विवाह धर्मपरायण, गुणसंपत्र पुष्पाबाई के साथ संपन्न हुआ। आप दोनों की जोड़ी देव गुरु धर्म के प्रति अत्यंत श्रद्धावान है। आप दोनों ने सज्जडेड़े दो वर्षीतप की सुदीर्घ तप आराधना संपन्न की। सम्पतराजजी कोठारी ने 500 आयम्बिल तप (दो दिन आयम्बिल एवं तीसरे दिन बियासना), अनेक वर्षों तक प्रतिवर्ष अट्ठाई एवं तेले की आराधना तथा अनेकानेक आयम्बिल, उपवास आदि की तपाराधना के साथ एक आदर्श आवक कर जीवन जिया है। अभी भी आप प्रति दिन उभवकाल (प्रातः एवं सार्यः) प्रतिक्रमण करते हुए धर्ममय जीवनयापन कर रहे हैं। आपकी धर्मनिष्ठा एवं सात्विक जीवन की जितनी प्रशंसा करे उतनी कम है। सम्पतराजजी के दो सुपुत्र गिरीशजी कोठारी एवं प्रियंशजी कोठारी हैं।

गिरीशकुमारजी कोठारी बचपन से ही अपने माता पिता से सुसंस्कारों को प्राप्त कर प्रतिभाशाली रहे हैं। गिरीशकुमारजी का विवाह सेलम के सुप्रसिद्ध श्रेष्ठिवर्य स्व. रतनचंदजी गालिया की सुपौत्री एवं निर्मलादेवी स्व. बस्तीमलजी गालिया की सुपुत्री प्रतिभादेवी के साथ संपन्न हुआ। प्रतिभादेवी कोठारी कल्पतरु अपार्टमेंट के पूजा मंडल में सक्रिय कार्यकर्ता हैं। गिरीशजी कोठारी ने अपने पैतृक व्यवसाय फाइनेंस के प्रतिष्ठान कोठारी एंटरप्राईजेज को उन्नति के शिखर पर अग्रसर किया है। आपने 2017 में नए प्रतिष्ठान एन.एन. फिन कॉर्प, एच. के. इन्वेस्टमेंट्स तथा एन. एन.एच. इन्वेस्टमेंट्स के माध्यम से रियल एस्टेट एवं वेयर हाऊस व्यवसाय में सफलता का ध्वज फहराया है। गिरीशजी कोठारी अनेक सामाजिक संस्थाओं एवं समाजसेवी संत्याओं के सक्रिय सहयोगी हैं। जैन समाज के अग्रणी संस्था जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाईजेशन ‘जीतो’ के एफसीपी सदस्य हैं। भगवान महावीर जैन हॉस्पिटल के ट्रस्टी हैं। राजस्थान यूथ एसोसिएशन एवं एल.जी. फ्रेंड्स के अग्रणी कार्यकर्ता है।
आपके दो सुपुत्रियाँ निक्षा एवं नियति है। निक्षा कोठारी लंदन में सी.ए. एवं एम.बी.ए. की पढ़ाई एवं नियति कोठारी भी लंदन में एम.बी.ए. इन मार्केटिंग की पढ़ाई कर रही हैं। आपके भाई प्रियेशजी कोठारी के सुपुत्र हियान नौवीं कक्षा में अस्ययन कर रहे हैं।

जिनशासन की सेवा में अग्रणी हैं उदारमना सम्पतराजजी कोठारी
श्री आदिनाथ जैन मंदिर विकपेट के ट्रस्टी रहे हैं। श्री वासुपूज्यस्वामी जैन श्वेताम्बर मंदिर, माधवनगर के ट्रस्टी हैं। श्री मुनिसुव्रतस्वामी जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट, कुमारापार्क के ट्रस्टी हैं। श्री श्रावस्ती तीर्थ, उत्तर प्रदेश के ट्रस्टी हैं। श्री कुंथुनाथ जैन मंदिर, उदयनगर कृष्णराजपुरम के ट्रस्टी हैं। श्री पालीताणा महातीर्थ में बेंगलूरु भवन के ट्रस्टी हैं। श्री वासुपूज्यस्वामी जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट माधवनगर के उपाध्यक्ष हैं। श्री जैन संघ बांकली के उपाध्ययक्ष पद को भी सुशोभित कर रहे हैं। एवं अनेकों संस्थाओं में ट्रस्टी एवं सहयोगी बनकर जिनशासन की सेवा में प्रशंसनीय योगदान कर जीवन को सार्थक कर रहे हैं।

जैन समय ‘अनमोल रत्न’ गिरीशजी कोठारी – जैन समय के ‘अनमोल रत्न’ गिरीशकुमारजी कोठारी की रग-रग में जैन धर्म की प्रभावला की प्रबलतम भावना है। इसी भावना से आपने जैन समय के विश्व व्यापी धर्मप्रचार अभियान को गति देने हेतु जैन समय के स्तंग सहयोगी बनकर हमारे उत्साह को अनेक गुणा बढ़ाया है। कोठारी परिवार के लिये सर्वसुखमय जीवन की यशस्वी मंगलकामनायें करते हुए शत शत आभार प्रदर्शित करते हैं।



