एक अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी, जैन समाज के हृदयहार, दानवीर भामाशाह, बेंगलोर निवासी श्री कमलजी सिपानी एवं धर्मपरायणा ममता की मूर्ति श्रीमती विमलादेवी सिपानी की सुपुत्री एकताजी को जैन जगत की उज्जवल नक्षत्र कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । अहमदाबाद निवासी सुप्रतिष्ठित व्यवसायी श्री संजयजी देवड़ा एवं श्रीमती स्नेहा देवी देवड़ा के सुपुत्र मधुर भाषी श्री संकेतजी देवड़ा की धर्मपत्नी श्रीमती एकता देवड़ा ने जैन समाज के युवा जगत का नाम विश्व सर्व पर गौरवान्वित किया है। आपने वर्ष 2015 में सॉल्ट लेक सिटी, U.S.A. (अमेरिका) में विश्वसर्व धर्म सम्मेलन में भाग लेकर आचार्य श्री नानेश के ‘समता दर्शन और व्यवहार से प्रेरणा लेकर ‘STRESS MANAGEMENT विषय पर प्रस्तुति देकर एक मिसाल कायम की है।
जैन समाज के भारत भर के उत्कृष्ट स्तर के वैभवशाली परिवारों में से एक सिपानी परिवार में जन्म लेकर भी आप अहंकार से दूर हैं। मधुर व्यवहार की धनी श्रीमती एकताजी देवड़ा में बचपन से ही धर्म के प्रति गहरा लगाव रहा है। आपने नव युवा उम्र में ही सामायिक, प्रतिक्रमण, 25 बोल तत्वों का ज्ञान अर्जित कर लिया। दशवैकालिक सूत्र उत्तराध्ययन सूत्र आदि सिध्दान्त परक ग्रंथो का सम्यक अध्ययन किया है। आपके हृदय में युवा वर्ग को धर्म से जोड़ने की प्रबल भावना है और आप इस दिशा में प्रसंशनीय पुरूषार्थ कर रही हैं।
आपका अनुभव कहता है कि युवा वर्ग के समक्ष जैन धर्म के सिध्दानतों को सरल एवं आकर्षक तरीके से समझाया जाये तो अधिक से अधिक युवा जैन धर्म के सिधानतों को अपने जीवन में अपना सकते हैं। आपका कहना है कि जैन धर्म के सिध्दान्तों अत्यन्त सरल हैं और हमारे जीवन को सही तरीके से जीने का मार्ग दिखाते हैं। जैन धर्म का पालन करने वाला सारे विश्व का मित्र बन जाता हैं। हर कार्य को विवेक पूर्वक करना जिससे किसी दूसरे प्राणी को कष्ट नहीं हो, यही तो जैन धर्म का मर्म है।
आप साधु – साध्वी गण को संपूर्ण मानव जाति के लिए मार्गदर्शक मानती हैं। आप श्रध्दापूर्वक कहती हैं कि जैन साधु सिर्फ उपदेश ही नही देते है, अपितु अपने स्वयं के जीवन में सिध्दानतों का पालन करके प्राणी मात्र की रक्षा का पूरे विश्व के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
श्रीमती एकताजी विनम्रता की साक्षात् प्रतीक हैं। आप अपना अधिकांश समय युवा वर्ग को संस्कारित करने हेतु विभिन्न रचनात्मक कार्य करने में लगाती हैं। आज के आधुनिक वातावरण में पाश्चात्य संस्कृति की ओर अंधी दोड़ लगाने वाले युवाओं को भारत की महान संस्कृति से जोड़ने के श्रीमती एकता देवड़ा के सत प्रयासों की जितनी प्रसंशा की जाये उतनी कम है। जैन समय के स्तम्भ सहयोगी बनकर आपने जैन धर्म के विश्व – व्यापी प्रचार प्रसार के कार्य को बड़ा सम्बल प्रदान किया है। आप सदा स्वस्थ रहें। आप अपने सद् कार्यों से देश विदेश में अपने परिवार जैन समाज एवं देश का नाम आलोकित करेंगे, ऐसी मंगल कामनाएँ है।

