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युवा जगत के आदर्श हैं ‘अनमोल रत्न’ श्री दिलीपकुमारजी डागा

Dilipkumar Daga

सरल हृदय में ही धर्म का निवास होता है। विनय और विवेक धर्म का सच्चा मूल है। जिसके जीवन में सरलता और विनम्रता है, ऐसा धार्मिक जीवन धन्य एवं आदर्श है।

सरलता, विनम्रता, उदारता एवं धर्मनिष्ठा से जीवन को धन्य बना रहे हैं युवा जगत के आदर्श ‘अनमोल रत्न’ दिलीपकुमारजी डागा

अतिथि देवो भवः की महान संस्कृति से परिपूर्ण वीर भूमि राजस्थान की धर्मनगरी खराड़ी, जैतारण के श्रेष्ठिवर्य स्व. अमरचंदजी स्व. चंचलबाईजी डागा के सुपौत्र, धर्म निष्ठ श्रावक रत्न स्व. सुगालचंदजी धर्म निष्ठ सुश्राविका स्व. दाखीबाईजी डागा के तीन सुपुत्र कमलचंदजी, नरेशकुमारजी, दिलीपकुमारजी डागा अपनी सरलता, विनम्रता एवं धर्मनिष्ठा के साथ जिनशासन की प्रभावना में अग्रसर हैं। सबसे छोटे सुपुत्र दिलीपजी डागा बेंगलूरु में डायमंड एवं एंटिक गोल्ड ज्वेलरी के व्यवसायिक क्षेत्र में सफलता का ध्वज फहराने के साथ ही सामाजिक, धार्मिक कार्यों में सहयोग कर युवा वर्ग के लिए एक आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं। आपके बड़े भ्राता द्वय कमलचंदजी एवं नरेशकुमारजी डागा तिरुवन्नामले में रियल एस्टेट व्यवसाय में डागा डेवलपर्स (डागा ग्रुप) के नाम से सुविख्यात हैं। दिलीपकुमारजी डागा का जन्म तमिलनाडु की सुप्रसिद्ध व्यवसायिक नगरी तिरुवन्नामले में हुआ।

आपमें नवयुवा अवस्था से ही हीरे जवाहरात आदि रत्नों के व्यवसाय में रुचि थी। करीब 20 वर्ष पूर्व आपने मल्लेश्वरम बेंगलूरु में बालाजी एक्सपोर्ट्स के नाम से व्यवसाय प्रारंभ किया। तत्पश्चात ज्वेलरी व्यवसाय के हृदय स्थल नगरथपेट में आपने डागा जेम्स एंड ज्वेलरी प्रा.लि. नाम से व्यवसाय प्रारंभ किया जिसे अपने मधुर व्यवहार, विनम्र व्यक्तित्व, प्रामाणिकता एवं लगन से बेंगलूरु में रत्न एवं आभूषण के व्यवसाय में शीघ्र ही बड़े प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान के रुप में स्थापित कर दिया है। आपका विवाह सैदापेट चेत्रई के 100 वर्षों से भी अधिक समय से निवासी सुविख्यात स्व. ताराचंदजी गेलड़ा की प्रपौत्री, स्व. कुशालचंदजी गेलड़ा की पौत्री एवं सुश्रावक धर्मचंदजी – किरणबाईजी गेलड़ा की गुणवान सुपुत्री वंदनाजी के साथ संपन्न हुआ। चेन्नई के बुजुर्ग व्यक्ति ताराचंदजी गेलड़ा की धार्मिक सेवाओं और व्यवहार को आज भी याद करते हैं। वंदनाजी के बड़े पिताजी विनयचंदजी गेलड़ा सैदापेट जैन स्थानक के अध्यक्ष हैं। आपके भ्राता नवीनजी गेलड़ा एवं राजेशजी गेलड़ा बेंगलूरु में निवास कर रहे हैं।

वंदनाजी डागा धर्म प्रेरणा में अग्रणी, साधु साध्वी भगवंतों की सेवा में तत्पर रहने वाली, तत्व ज्ञान पीपासु सुश्राविका हैं। वंदनाजी श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्या हैं। समता महिला मंडल बेंगलूरु में भी आप अत्यंत सक्रिय सेवाएँ प्रदान कर रही हैं। दिलीपकुमारजी डागा के बड़े भ्राता कमलचंदजी डागा एस.एस. जैन संघ तिरुवन्नामले के अध्यक्ष हैं। आप Vision Higher Secondary School, तिरुवन्नामलै के चेयरमैन हैं। यहाँ नाम मात्र के शुल्क पर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं जो अत्यंत प्रशंसनीय है। डागा परिवार संघ समाज सेवा में अग्रणी है। सबको साथ लेकर चलना, एकता और प्रेम का वातावरण बनाए रखना डागा परिवार की बड़ी विशेषता है। डागा परिवार जिनशासन में वीर परिवार है। दिवंगत श्री सम्पतमुनिजी म.सा. आपके संसार पक्षीय काकाश्री थे।

दिवंगत श्री मिलापमुनिजी म.सा. आपके संसार पक्षीय मामाश्री (मिलापचंदजी बरड़िया), मामीसा साध्वी रेवतीबाई म.सा. थे। आपके मामेरा भाई श्री पूरणमुनिजी म.सा. ज्ञानगच्छ में दीक्षित होकर जिनशासन को दीपायमान कर रहे हैं। दिलीपकुमारजी डागा धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आप श्री समता प्रचार संघ के सहसंयोजक हैं। श्री सुधर्म जैन पौषधशाला के ट्रस्टी हैं। ‘जैन समय’ समाचार पत्र समूह के स्तंभ सहयोगी हैं। आप प्रति दिन सामायिक स्वाध्याय साधना, हर पक्खी पौषध, प्रतिक्रमण, पर्युषण पर्व एवं होली चातुर्मासिक पर्व पर स्वाध्याय सेवा प्रदान करते हैं।

वीर निर्वाण महोत्सव दीपावली को आप गुरु भगवंतों के सानिध्य में उपवास तेला आदि धर्म आराधना पूर्वक मनाकर युवा पीढ़ी के लिए आदर्श प्रस्तुत कर रहे हैं। आपका निवास मल्लेश्वरम में था लेकिन जैसे ही चामराजपेट संघ ने आचार्य श्री रामलालजी म.सा. के श्री चरणों में चातुर्मास प्रदान करने की विनती की तो आपने तभी चामराजपेट में अपना निवास स्थानांतरित कर दिया जो आपकी उत्कृष्ट धर्मप्रियता को दर्शाता है। आपके बहन बहनोई स्व. प्रकाशबाईजी गौतमचंदजी बांठिया टिंडीवणम, रत्नीबाईजी (मुत्रीबाईजी) स्व. विजयचंदजी झाबक टी. नगर चेत्रई, निर्मलाबाईजी – सुनीलकुमारजी बाफना हैरिंगटन रोड चेन्नई भी धर्म ध्यान में अग्रणी हैं। आपके 22 वर्षीय सुपुत्र श्रेयांसजी डागा BBA की पढ़ाई एवं Diamonds Course पूर्ण कर मुंबई में Digital Marketing Course कर रहे हैं। आपकी 20 वर्षीय सुपुत्री लीनाजी डागा BBA की पढ़ाई कर रही हैं।

जिनशासन सेवा में भी अग्रणी हैं दिलीपजी डागा
ज्ञान ध्यान सीखने एवं सिखाने में गहन रुचि रखने वाले दिलीपजी डागा स्वाध्याय साधना हेतु भी समर्पित हैं। समता भवन, बेंगलूरु में मई महिने में शासन दीपिका श्री समिहाश्रीजी म.सा., शासन दीपिका श्री दिव्यदेशनाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में श्री साधुमार्गी जैन संघ के तत्वावधान में समता प्रचार संघ द्वारा आयोजित ज्ञान ज्योति शिविर के संयोजक रहे हैं। आपने समता प्रचार संघ के राष्ट्रीय संयोजक सुभाषचंदजी गोखरु, कर्नाटक संयोजक जसवंतजी मांडोत, साधुमार्गी संघ बेंगलूरु के अध्यक्ष धर्मचंदजी बंबकी एवं मंत्री अशोकजी नागोरी के साथ पूरे कर्नाटक में विभिन्न शहरों में पधारकर संपर्क अभियान चलाया और ज्ञान ज्योति शिविर को सफल बनाया ।

दिलीपकुमारजी डागा हँसमुख एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी हैं। मिलनसारिता व मधुर भाषिता आपका स्वभाव है। सबके साथ प्रेम पूर्ण व्यवहार आपकी विशेषता है। आपका अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ मैत्री संबंध हैं। आपने अपनी व्यवहार कुशलता एवं निष्ठा से डायमंड्स एवं ज्वेलरी व्यवसाय में विशेष प्रतिष्ठा अर्जित की है। आपका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को आधुनिकता के साथ ही अपने जैन धर्म के सर्वोपरि संस्कारों को भी जीवन में सबसे आगे रखना चाहिए। धन में वृद्धि के साथ धर्म में भी वृद्धि का प्रयास करते रहें।

जैन समय ‘अनमोल रत्न’ दिलीपकुमारजी डागा
जैन समय के ‘अनमोल रत्न’ दिलीपकुमारजी डागा की रग – रग में जैन धर्म की प्रभावना की प्रबलतम भावना है। जैन समय के विश्व व्यापी धर्मप्रचार अभियान को गति देने हेतु आपने जैन समय के स्तंभ सहयोगी बनकर हमारे उत्साह को अनेक गुणा बढ़ाया है। हम डागा परिवार के लिये सर्वसुखमय जीवन की यशस्वी मंगलकामनायें करते हुए शत शत आभार प्रदर्शित करते हैं।