पुण्य उपार्जन से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। परोपकार – मानवसेवा – जीवदया एवं धर्म कार्यों में इसका सदुपयोग करने
से उसमें निरंतर अभिवृद्धि होती है। जैन एकता की प्रबल भावना है हरीशजी पोरवाल में
पुण्योपार्जित लक्ष्मी का मानव सेवा में विपुल सदुपयोग कर रहे हैं जीवदया एवं मानवसेवा में समर्पित अनमोल रत्न हरीशजी पोरवाल
हरीशजी पोरवाल के हृदय में जैन एकता की प्रबल भावना है। संप्रदायवाद की भावना से दूर हैं।
आचार्यश्री जिनोत्तमसूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी श्री शाश्वतश्रीजी म.सा. ने आपको धर्म भाई बनाया हुआ है।
आचार्यश्री जिनोत्तमसूरीश्वरजी की निश्रा में जीवित महोत्सव का भव्य आयोजन किया।
आचार्यश्री महेन्द्रसागरजी के चौमासी परिवर्तन का लाभ लिया।
आप अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से विशेष सहयोगी के रुप में जुड़े हुए हैं।
दो बार आयम्बिल ओली कराने का लाभ लिया।
देवनहल्ली तीर्थ में 112 नंबर की देव कुलिका के लाभार्थी हैं।
नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन मंदिर, राजाजीनगर बेंगलूरु के आजीवन सदस्य हैं।
पालीताणा में पार्श्व भैरव धाम के ट्रस्टी हैं।
कर्नाटक स्टेट राजस्थान समाज सेवक संस्था के कोषाध्यक्ष हैं।
अपने निवास पर दो बार महावीरस्वामीजी के पालनाजी का लाभ लिया।
शंखेश्वर महातीर्थ में श्री पार्श्व भैरव धाम सुशील विहार में संस्थापक सदस्य (भूमि दानदाता) हैं।
राष्ट्रप्रेम, धर्मनिष्ठा, वीरता एवं त्याग की पवित्र भूमि राजस्थान में धर्म नगरी खिवांदी – शिवगंज निवासी बादलबेन – घीसुलालजी पोरवाल (भगवानचंदजी प्रेमचंदजी मुठलिया पोरवाल परिवार) के सुपत्र हरीशजी पोरवाल मानवसेवा कार्यों से अपनी विशिष्ट पहचान निर्मित कर रहे हैं। करीब 60 वर्ष पूर्व घीसुलालजी मुठलिया पोरवाल बेंगलूरु महानगर में व्यापार करने आए। आप वी.आई.पी. सूटकेस के डिस्ट्रीब्यूटर्स थे एवं स्वयं का भी मैन्यूफैक्चरिंग का काम प्रारंभ किया। उसके पश्चात करीब 40 वर्ष पूर्व होलसेल व्यापार भी प्रारंभ किया। आपका स्वर्गवास 26 सितंबर 2024 को बेंगलूरु में हो गया।
आपके कुशल मार्गदर्शन से पूरा परिवार संयुक्त परिवार है। घीसुलालजी के प्रथम पुत्र पुत्रवधु नरेन्द्र – तरुणाबेन (होलसेल कॉस्मेटिक्स व्यापार) हैं जिनके पुत्र महावीर ने BBA की पढ़ाई पूर्ण की है एवं पुत्री-जंवाई जिज्ञासा – हर्षजी साकरिया हुबली निवासी हैं। द्वितीय पुत्र – पुत्रवधु दिलीपजी – हेमाबाई पोरवाल (क्लॉथ शोरुम) हैं जिनके पुत्र गौतम ने Interior Design Course किया है एवं पुत्री वेतिका भी अध्ययन कर रही हैं।
आपके तृतीय पुत्र मनोजजी पोरवाल (एम. सी.एक्स.) का कुछ समय पूर्व स्वगर्वास हो गया। आपके चतुर्थ पुत्र हरीशजी पोरवाल (गोल्डन ज्वेलर्स) हैं। घीसुलालजी पोरवाल के सुपुत्री – जंवाई ललिताबाई – हीराचंदजी चौहान, चेन्नई एवं दौहित्र-दौहित्रवधु दीक्षित, तरुण – केजल हैं। आपके चौथे पुत्र हरीशजी पोरवाल अत्यंत प्रतिभाशाली एवं उत्साह के धनी हैं। आपने बी.कॉम. की पढ़ाई के पश्चात आज से लगभग 25 वर्षों पूर्व आर.टी. स्ट्रीट में गोल्डन ज्वेलर्स के नाम से ज्वेलरी व्यवसाय प्रारंभ किया जो आज बेंगलूरु में एक ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठान है।
हरीशजी पोरवाल कुशाग्र बुद्धि के धनी हैं और व्यापारिक कुशलता आपकी विशेषता है जिससे आपने परिवार को समृद्ध बनाया। आपने कड़ी मेहनत, लगन और ऊंची सोच रखकर काम को आगे बढ़ाया जिससे आपने जीवन में निरंतर सफलता प्राप्त की। युवा अवस्था में आपमें धन कमाने का भरपूर उत्साह था। धन में अभिवृद्धि के साथ आपके हृदय में धर्म के प्रति श्रद्धा भी बढ़ती गई। आप देव, गुरु, धर्म के प्रति श्रद्धावान बने और सुकृत कार्यों में लक्ष्मी का यथासंभव अधिक से अधिक सदुपयोग करना प्रारंभकिया।
आपके हृदय में मानवसेवा एवं जीवदया की भावना कूट कूटकर भरी हुई है और इस दिशा में आप यथासंभव योगदान कर रहे हैं।
जरुरतमंदों को शिक्षा एवं चिकित्सा में सहायता मिले ऐसी आपकी प्रबल भावना है और इस हेतु आप बड़ा लक्ष्य लेकर कार्य कर रहे हैं। आपने अनेक मानवसेवा कार्य प्रारंभ किए हैं। पिछले कई वर्षों से प्रतिवर्ष वैकुण्ठ एकादशी एवं करगा महोत्सव पर अन्नदान प्रसादी का विशाल आयोजन गतिमान है जिसमें 8-10 हजार व्यक्तियों को अपने प्रतिष्ठान गोल्डन ज्वेलर्स के सामने काऊंटर लगाकर आप स्वयं अपने हाथों से एवं अपने मित्रों के हाथों से भोजन एवं फलों का वितरण करते हैं।
जिसकी लोग मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए नहीं थकते हैं। हरीशजी पोरवाल अपने जन्म दिवस एवं माता-पिता के वैवाहिक वर्षगांठ दिवस को भी शुभ कार्यों में सहयोग कर मनाते हैं। जैन समय के अनमोल रत्न के रुप में जुड़कर आप जिनशासन एवं चतुर्विध संघ की अभिवृद्धि में सहभागी बनें, ऐसी आपकी प्रकृष्ट भावना अभिनंदनीय है।
हरीशजी पोरवाल मित्रता के आदर्श हैं। अपने रिश्तेदारों व मित्रों का कार्य अपना कार्य समझते हैं और पूरा साथ निभाते हैं। मित्रों का कहना है कि कार्य के प्रारंभ से लेकर जब तक कार्य पूरा नहीं हो जाए तब तकउनका साथ नहीं छोड़ते हैं। जिसके भी साथ जुड़ जाते हैं, उसका हर कार्य सुंदर तरीके से हो, यही आपका प्रयास रहता है।
जैन एकता की प्रबल भावना है हरीशजी पोरवाल में
हरीशजी पोरवाल के हृदय में जैन एकता की प्रबल भावना है। संप्रदायवाद की भावना से दूर हैं। आचार्यश्री जिनोत्तमसूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी साध्वी श्री शाश्वतश्रीजी म.सा. ने आपको धर्म भाई बनाया हुआ है। आचार्यश्री जिनोत्तमसूरीश्वरजी की निश्रा में जीवित महोत्सव का भव्य आयोजन किया। आचार्यश्री महेन्द्रसागरजी के चौमासी परिवर्तन का लाभ लिया।
आप अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से विशेष सहयोगी के रुप में जुड़े हुए हैं। दो बार आयम्बिल ओली कराने का लाभ लिया। देवनहल्ली तीर्थ में 112 नंबर की देव कुलिका के लाभार्थी हैं। नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन मंदिर, राजाजीनगर बेंगलूरु के आजीवन सदस्य हैं। पालीताणा में पार्श्व भैरव धाम के ट्रस्टी हैं। कर्नाटक स्टेट राजस्थान समाज सेवक संस्था के कोषाध्यक्ष हैं।
अपने निवास पर दो बार महावीरस्वामीजी के पालनाजी का लाभ लिया। शंखेश्वर महातीर्थ में श्री पार्श्व भैरव धाम सुशील विहार में संस्थापक सदस्य (भूमि दानदाता) हैं।
आपने बेंगलूरु, मुंबई, पूना, शिवमोग्गा, हुब्बली, सुशीलधाम अत्तीबेले बेंगलूरु, खिवांदी आदि स्थानों पर जिन प्रतिमा की स्वर्ण मुद्राओं एवं बहुमूल्य रत्नों की अत्याकर्षक अद्भुत अंगरचना की। आपकी जिन भक्ति की भावना एवं समर्पण प्रशंसनीय है।
जैन समय ‘अनमोल रत्न’ हरीशजी पोरवाल
जैन समय के ‘अनमोल रत्न’ हरीशजी पोरवाल की रग-रग में जैन धर्म की प्रभावना की प्रबलतम भावना है। जैन समय के विश्व व्यापी धर्मप्रचार अभियान को गति देने हेतु आपने जैन समय के स्तंभ सहयोगी बनकर हमारे उत्साह को अनेक गुणा बढ़ाया है। हम पोरवाल परिवार के लिये सर्वसुखमय जीवन की यशस्वी मंगलकामनायें करते हुए शत शत आभार प्रदर्शित करते हैं।

