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धर्म, संस्कार और प्रेम से सुसज्जित जीवन है श्री उदयलालजी पोखरणा का

Udaylalji Pokharna

व्यवहार में आत्मीयता, हृदय में संस्कार है, धर्म और सेवा से जीवन हुआ साकार है। सबको साथ लेकर चलना जिनकी पहचान बनी, उदयलालजी का व्यक्तित्व सरलता का दर्पण है।

धर्म, संस्कार और प्रेम से सुसज्जित जीवन, मधुर स्वभाव के धनी जिनशासन सेवा में समर्पित अनमोल रत्न उदयलालजी पोखरणा

राजस्थान की पुण्यधरा मेवाड़ के राजसमंद जिले स्थित मोखुन्दा ग्राम में जन्मे धर्मपरायण, सरल हृदय, मिलनसार एवं समाजहितैषी व्यक्तित्व के धनी श्रावक रत्न उदयलालजी पोखरणा आज समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं।
आपके व्यक्तित्व में धर्म, संस्कार, सेवा, समर्पण एवं व्यवसायिक दक्षता का अद्भुत समन्वय दृष्टिगोचर होता है।
धर्मनिष्ठ सुश्रावक स्व. लक्ष्मीचंदजी पोखरणा के सुपौत्र एवं उदारमना श्रेष्ठिवर्य सुश्रावक स्व. दीपचंदजी स्व. मीठुबाई पोखरणा के संस्कारवान सुपुत्र उदयलालजी ने अपने जीवन को परिश्रम, सत्यनिष्ठा एवं सदाचार के मार्ग पर अग्रसर रखा। आपके पिताश्री दीपचंदजी पोखरणा ने अपने मधुर व्यवहार, सज्जन स्वभाव, सहजता एवं आत्मीयता से समाज में विशेष सम्मान प्राप्त किया।
आपके नानाश्री कस्तूरचंदजी बाबेल ने भी आपके जीवन में वात्सल्यता की वर्षा की।
बाल्यकाल से ही सौम्य, गंभीर एवं प्रतिभा संपत्र उदयलालजी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मोखुन्दा ग्राम में प्राप्त की। आठवीं कक्षा के पश्चात आपने गंगापुर में पी.यू.सी. तक अध्ययन किया। अध्ययन काल से ही आपके भीतर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा एवं परिवार के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विद्यमान रही।
सीमित संसाधनों में भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने की दृढ़ इच्छाशक्ति ने आपको जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

संकल्प और सफलता की यात्रा
सन 1982 में आपने बेंगलूरु में पदार्पण किया। नई नगरी एवं नई परिस्थितियों के बीच आपने अथक परिश्रम, प्रामाणिकता एवं लगन से व्यापार का कार्य सीखा। आपकी सूझबूझ, मधुर व्यवहार और ग्राहकों के प्रति पारदर्शिता ने शीघ्र ही आपको व्यापार जगत में एक विश्वसनीय पहचान प्रदान की।
आपका शुभ विवाह सन 1984 में भीलवाड़ा जिले के ऊमरी ग्राम मूल निवासी सुश्रावक श्रेष्ठिवर्य स्व. धर्मचंदजी स्व. सायरबाई दक की गुणवान सुपुत्री शीलाजी के साथ संपन्न हुआ।
सन 1985 में आपने स्वयं का गिरवी एवं ज्वेलर्स व्यवसाय प्रारम्भ किया। व्यापार आपके लिए विश्वास और संबंधों की पूंजी है। आपकी कार्यशैली में कर्तव्य निष्ठा, ग्राहकों के प्रति आत्मीयता एवं व्यवहार में मधुरता सदैव झलकती है। यही कारण है कि आपने व्यापार क्षेत्र में यश, प्रतिष्ठा एवं सम्मान अर्जित किया। आपका जीवन युवा वर्ग में उत्साह एवं प्रेरणा का संचार करता है। आपका प्रतिष्ठान वर्धमान ज्वेल्स जयनगर में अग्रणी स्वर्णाभूषण शोरूमों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ‘झंकार ज्वेल्स’ नगरथपेट में एवं ‘दिव्यम’ हाउस ऑफ सिल्वर, जयनगर में सफलता का ध्वज लहरा रहे हैं।
स्व. आपके बड़े भ्राता लादुलालजी शकुंतलादेवी पोखरणा (सारक्की) का स्नेह एवं मार्गदर्शन आपके लिए प्रेरणास्रोत रहा। अपके अनुज स्व. छीतरमलजी – लीलादेवी पोखरणा के प्रति आपका प्रेम, पारिवारिक एकता व समर्पण अनुकरणीय है।
आपके बहन-बहनोईसा स्व. मोहनबाई स्व. श्री किशनलालजी कोठारी (लसानी) बेंगलूरु का परिवार भी संस्कार, स्नेह एवं आत्मीयता से परिपूर्ण है।

धर्म भावना और गुरु निष्ठा
उदयलालजी पोखरणा का जीवन धर्म, समाज एवं संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन में भी अत्यंत सराहनीय रहा है। आपके हृदय में जैन धर्म, तेरापंथ धर्मसंघ के 11 वें अधिशास्ता, आचार्य श्री महाश्रमणजी के प्रति गहरी श्रद्धा और अटूट निष्ठा विद्यमान है। आप सदैव साधु-साध्वी भगवंतों के प्रति विनम्र भाव रखते हुए संघ की गतिविधियों में सक्रिय सहयोग प्रदान करते रहे हैं।
आपके भीतर समाज को संगठित करने एवं नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ने की विशेष भावना रही है। जीवदया, परोपकार एवं सेवाकार्यों हेतु आपने सदैव तन-मन-धन से सहयोग प्रदान किया।
मिलनसारिता, मधुर व्यवहार एवं आत्मीयता के अनुपम आदर्श
उदयलालजी पोखरणा का जीवन सेवा, संस्कार एवं सफलता का प्रेरणादायी उदाहरण है। आपने अपनी कर्मठता, व्यवहार कुशलता, उदारता एवं धर्मनिष्ठा से समाज में विशिष्ट प्रतिष्ठा अर्जित की है। आप उन व्यक्तित्वों में से हैं जो स्वयं आगे बढ़ते हुए सभी को साथ लेकर चलते हैं।
सगे संबंधियों मित्रों एवं समाजजनों के साथ आपका संवाद अत्यंत मधुर एवं प्रेरणादायी रहता है। आप सबको साथ लेकर चलने वाले, परिवार को एक सूत्र में पिरोकर रखने वाले एवं सामाजिक संबंधों को स्नेह से निभाने वाले व्यक्तित्व हैं। आपकी मिलनसारिता एवं विनम्रता प्रत्येक मिलने वाले को अपना बना लेती है। आपके परिवार में संस्कार, प्रेम एवं धार्मिक वातावरण की सुंदर छटा दिखाई देती है। पोखरणा परिवार मर्यादा, संस्कार एवं सामाजिक प्रतिष्ठा का परिचायक है।

धार्मिक, सामाजिक और सेवाकार्यों में विराट योगदान
अनमोल रत्न उदयलालजी पोखरणा तन मन धन से समाज हित के कार्यों में अग्रणी रहे हैं।
संस्थापक : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा, जयनगर, बेंगलूरु
ट्रस्टी : आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना केंद्र, कुम्बलगोडु, बैंगलूरु
आजीवन सदस्य : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा, गांधीनगर, बेंगलूरु
आजीवन सदस्य : भिक्षु धाम, अडकमारनहल्ली, बेंगलूरु
ट्रस्टी : मेवाड़ पैलेस, बसवेश्वरनगर, बेंगलूरु
सहयोगी : महावीर संस्कार धाम, सूरत
कमरे के लाभार्थी : श्री गणेश जैन गौशाला, कनकपुरा रोड, बेंगलूरु
कार्यकारिणी सदस्य : आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना केंद्र एवं सेवा केंद्र

हृदय में सेवा भाव, व्यवहार में अपनत्व और चेहरे पर मीठी मुस्कान
आपके सुपुत्र ललितजी का शुभविवाह आमेट मूल के चामराजपेट निवासी नवरतनमलजी – शीलाबाई गाँधी की सुपुत्री दीपमालाजी के साथ हुआ। आपके सुपुत्र रोहितजी का शुभविवाह लसानी मूल के राजाजीनगर निवासी राजमलजी शकुंतलाबाई की सुपुत्री रानीजी के साथ हुआ। आपके सुपुत्र अमितजी का शुभविवाह बेमाली मूल के
बसवेश्वरनगर निवासी कैलाशचंद्रजी रेखाबाई नंगावत की सुपुत्री निकिता के साथ हुआ। आपके पुत्र हर्षित का शुभविवाह बेमाली मूल के चन्नरायपट्टणा निवासी राकेशजी चंद्राबाई बोहरा के साथ हुआ। आपकी पुत्री ममताजी का शुभविवाह गंगापुर मूल के टी. दासरहल्ली निवासी शांतिलालजी मैनाबाई गिलुण्डिया के सुपुत्र सचिनजी के
साथ हुआ। आपकी पुत्री श्वेताजी का शुभविवाह देवगढ़ मूल के नंजनगुड निवासी महावीरचंदजी देवीबाई देसरला के सुपुत्र गौरवजी के साथ हुआ। आपके सुपौत्र कवीशजी सातवीं कक्षा एवं तीर्थजी नर्सरी कक्षा में अध्ययन कर रहे हैं। आपकी सुपौत्री रूहीजी चौथी कक्षा, हियाजी एवं हीरजी नर्सरी कक्षा में अध्ययन कर रहे हैं।

जैन समय ‘अनमोल रत्न’ उदयलालजी पोखरणा
आप दृढ़ निश्चय एवं दूरदर्शी विचारों के धनी हैं। आप में पदलिप्सा लेशमात्र भी नहीं है जिससे सबके हृदय में आपने विशेष स्थान निर्मित किया है। जैन समय के ‘अनमोल रत्न’ उदयलालजी पोखरणा की रग – रग में जैन धर्म की प्रभावना की प्रबलतम भावना है। जैन समय के विश्व व्यापी धर्मप्रचार अभियान को गति देने हेतु आपने जैन समय के स्तंभ सहयोगी बनकर हमारे उत्साह को अनेक गुणा बढ़ाया है। हम पोखरणा परिवार के लिये सर्वसुखमय जीवन की यशस्वी मंगलकामनायें करते हुए शत शत आभार प्रदर्शित करते हैं।

Udaylalji Pokharna