- साधना – निरंतर प्रयत्न : आचार्य श्री रामेश
मन-वचन-काया को सुव्यवस्थित करने के लिए जो निरन्तर प्रयत्न जारी रहता है, वह साधना है। मन को साधने के लिए देखना होगा कि मन कब किस रूप में परिणत हो जाता है। उसमें कब तनाव आता है, कब खुशी होती है। तनाव व प्रसन्नता के कारणों को जानकर उनकी समीक्षा करना कि क्या वस्तुतः अमुक…

